कब्ज कोई मज़ाक नहीं बल्कि एक गंभीर समस्या है, जिसका निदान जरुरी है

कुछ लोगों को सुबह के वक्त शौचालय में काफी समय बिताना पड़ता है लेकिन वे अपने इस परेशानी को खुलकर लोगों के सामने नहीं रख पाते हैं। आइये जानते हैं कब्ज से होने वाली परेशानियां और कैसे करैं उपाय

Piles

Constipation यानी की कब्ज आज एक आम समस्या बन गई है लेकिन यह एक गंभीर समस्या का आगाज हो सकती है। कब्ज पाचन सम्बंधित एक समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह तब होता है, जब मल सूखा और सख्त हो जाता है, जिससे मल त्याग करने में कठिनाई होती है। हालांकि अधिकतर लोग इससे गंभीर न समझ कर मज़ाक में लेते हैं और घंटों सुबह बाथरुम में बैठे रहते हैं। इस दौरान वे फोन का इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ लोग अखबार पढ़ते हैं लेकिन इसे एक समस्या मान करके इसके बारे में खुलकर बात नहीं करते। 

यही कारण है कि हर साल कब्ज को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए Constipation Awareness Month मनाया जाता है। कब्ज एक बार-बार होने वाली गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्थिति है, जो सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। सामान्य आबादी में इसकी व्यापकता लगभग 20% और बच्चों में 29.6% है। युवाओं की तुलना में बुजुर्गों में कब्ज अधिक आम है। बुजुर्ग महिलाएं पुरुष समकक्षों की तुलना में अधिक बार (दो से तीन बार) गंभीर कब्ज से पीड़ित होती हैं। साल 2018 गट हेल्थ सर्वे के अनुसार, भारत में 22% वयस्क कब्ज से पीड़ित हैं, जिनमें से 59% गंभीर कब्ज की शिकायत करते हैं और 27% कुछ अन्य बीमारियों से जुड़े कब्ज की शिकायत करते हैं। 

कब्ज के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सप्ताह में तीन से कम बार मल त्याग करना
  • मल त्याग करने में कठिनाई होना
  • सख्त और सूखा मल होना
  • मल त्याग करने के बाद भी हल्का महसूस ना होना
  • पेट में दर्द या ऐंठन होना
  • पेट फूलना

कब्ज होने के निम्नलिखित कारणों की पहचान की गई है-

  • कम फाइबर वाले आहार लेना
  • पर्याप्त पानी न पीना
  • नियमित शारीरिक गतिविधि न करना
  • मल त्याग की इच्छा को रोकना
  • खास तरह की दवाओं का उपयोग करना
  • अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति, जैसे कि मधुमेह, चिंता या अवसाद

गर्भावस्था और कब्ज़ के कारण

गर्भावस्था एक सुखद अनुभव हो सकता है, लेकिन कई महिलाएं इस समय में कब्ज़ की समस्याओं का सामना करती हैं। गर्भावस्था में कब्ज़ का मुख्य कारण हार्मोनल परिवर्तन और शारीरिक बदलाव हो सकता है, जिससे पेट की समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि गर्भावस्था के दौरान कब्ज होना एक सामान्य समस्या है लेकिन ज्यादा परेशानी होने पर चिकित्सक से संपर्क करना जरुरी है।

हार्मोनल परिवर्तन: गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे उनकी इंटेस्टाइनल मोटिलिटी कम हो जाती है और कब्ज़ हो सकता है।

शारीरिक बदलाव: गर्भावस्था के दौरान बच्चे की वजह से गर्भाशय में दबाव बढ़ सकता है, जिससे पेट में समस्याएं उत्पन्न हो सकता है।

आहार संबंधित कारण: कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण की कमी का सामना कर सकती हैं, जिससे कब्ज़ हो सकता है।

अधिकांश मामलों में, कब्ज को जीवनशैली में बदलाव करके प्रबंधित किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • आहार में अधिक फाइबर को शामिल करनाः फाइबर मल को नरम बनाने में मदद करता है और मल त्याग को आसान बनाता है। अच्छे फाइबर स्रोतों में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फलियां शामिल हैं।
  • पर्याप्त पानी पीनाः पानी मल को नरम रखने में मदद करता है और मल त्याग को सुचारू बनाता है इसलिए दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीने का लक्ष्य रखें। 
  • नियमित शारीरिक गतिविधि: व्यायाम मल त्याग को प्रोत्साहित करने में मदद करता है इसलिए प्रतिदिन 30 मिनट तक चलना या शारीरिक गतिविधि करना कब्ज की समस्या को कम कर सकता है।
  • मल त्याग की इच्छा को न रोकेंः जब आपको मल त्याग करने की इच्छा हो, तो शौचालय जाने में देरी न करें। कई बार बच्चे खेलकूद के कारण या अन्य कारणों से मल त्यागने में देरी करते हैं, जिससे कब्ज की समस्या हो जाती है। ऐसे में बच्चों को भी कब्ज के बारे में जानकारी देना जरुरी है।
Gastro surgeon

पुणे स्थित नोबेल अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार डॉ अभिजीत व्हाटकर, (लेप्रोस्कोपिक, जनरल सर्जन एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) बताते हैं कि, “शारीरिक गतिविधि का कम होना, तरल पदार्थ का कम सेवन करना, फाइबरयुक्त पदार्थों का कम सेवन करना, रात के खाने और सोने के बीच दो घंटों का अंतराल ना होना कब्ज का प्रमुख कारण हैं। ऐसे में कब्ज से बचने के उपायों में नशा ना करना और शरीर में तरल पदार्थों की कमी ना होने देना शामिल है। इसके अलावा मौसमी फलों जैसे – तरबूज, अंगूर, पपीता, सेब आदि का सेवन करना कब्ज को कम कर सकता है। साथ ही जो महिलाएं गर्भवती होती हैं, उन्हें भी कब्ज की समस्या हो जाती है क्योंकि उनके निचले भाग में वजन पड़ता है। ऐसे में जरुरी है कि थोड़ी-थोड़ी देर पर टहला जाए, तरल पदार्थों का सेवन करें आदि। यदि जीवनशैली में बदलाव करने से भी कब्ज में सुधार नहीं होता है, तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें।” 

Gastroenterologist at Max Healthcare

मैक्स हेल्थकेयर में सलाहकार सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शशांक अग्रवाल बताते हैं कि कब्ज की समस्या असुविधाजनक होती है। मल का बार-बार रुकावट के साथ निकलना परेशानी का कारण बनता है। इसका सबसे आम कारण अस्वास्थ्यकर आदतें हैं, जैसे – आहार में कम फाइबर या पानी का कम सेवन। अनियमित आहार पद्धतियां जैसे संतृप्त वसा का अधिक सेवन, जंक फूड के अधिकतर सेवन से भी कब्ज की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है।
चिकित्सीय कारणों में आंत की गतिशीलता में कमी और आंतों की अतिसंवेदनशीलता शामिल हैं। यह (strictures) स्ट्रिक्चर्स, पॉलीप्स या कैंसर जैसे सर्जिकल कारणों से भी हो सकता है। पेल्विक मांसपेशियों की कमजोरी अक्सर संरचनात्मक असामान्यताओं का कारण बनती है, जिससे कब्ज की समस्या शुरु हो सकती है।
कब्ज से बचने का सबसे अच्छा तरीका आहार में फाइबर और तरल पदार्थों को शामिल करना है। साथ ही जीवनशैली में व्यायाम को शामिल करना भी बेहद जरूरी है। आजकल लंबे समय तक बैठने वाली नौकरियों के कारण गतिहीन जीवनशैली से कब्ज की शिकायतें बढ़ रही हैं। ऐसे में बार-बार ब्रेक लेना और टहलना एक उपाय के तौर पर शामिल किया जा सकता है।
गर्भावस्था में भी कभी-कभी कब्ज की समस्या हो जाती है क्योंकि मल त्यागने के दौरान मल द्वार की मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न होता है। गर्भावस्था कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक अनुभव है। ऐसे में नियमित एवं स्वस्थ जीवनशैली कब्ज की समस्या को ठीक करने में मदद करेंगी।

Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.