ढीले स्तनों को मेडिकल भाषा में ब्रेस्ट टोसिस के रूप में जाना जाता है। यह किसी भी उम्र की महिला को हो सकती है। ढीले स्तनों के कारणों में उम्र, गर्भावस्था, वजन में परिवर्तन, आनुवंशिकी आदि शामिल हो सकते हैं। इसका शरीर पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है। इस लेख में हमने ढीले स्तनों (saggy breast) की संपूर्ण जानकारी दी है, इसलिए इसे पूरा पढ़ें।
ढीले स्तनों के कारण क्या हैं?
सभी महिलाओं को यह समझने की आवश्यकता है कि स्तन का विकास एक जटिल प्रक्रिया है, और वे मुख्य रूप से शिशुओं के पोषण के लिए दूध के उत्पादन के लिए स्तन ग्रंथियों के कारण होते हैं। इसकी संरचना और आकार विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जिनमें शामिल हैंः
- गुरुत्वाकर्षणः स्तन पर गुरुत्वाकर्षण के लंबे समय तक प्रभाव के कारण यह ढीले हो सकती हैं। यह समस्या मुख्य रूप से उन महिलाओं में देखने को मिलती है, जिनके स्तनों का आकार अधिक होता है।
- गर्भावस्थाः इस चरण में कई हार्मोनल परिवर्तन शामिल होते हैं जो ढीले स्तनों का कारण बन सकते हैं।
- वजन में परिवर्तन: वजन के बढ़ने या कम होने का सीधा असर स्तनों पर पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप ढीले स्तनों की समस्या हो सकती है।
- उम्र: जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे उसकी त्वचा लोच और कोलेजन खो देती है। यह ढीले स्तनों का कारण बन सकती है।
- स्तनों का आकारः छोटे स्तनों की तुलना में बड़े स्तनों के ढीले होने की संभावना अधिक होती है।
- धूम्रपानः सिगरेट में कार्सिनोजेन इलास्टिन को कम कर देता है जिससे त्वचा की लोच कम हो जाती है, जिससे त्वचा शिथिल हो जाती है। यह स्तन ग्रंथि में उत्पादित दूध की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। अन्य कारकों में शामिल हो सकते हैंः
- रजोनिवृत्ति
- मैक्रोमास्टिया (स्तनों के आकार का बढ़ना)
- स्तन ग्रंथियों का विघटन
- त्वचा की लोच
- कूपर का लिगामेंट (weakened breast ligaments)
ढीले स्तनों संबंधी 5 मिथक क्या हैं?
किसी भी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या की भांति महिलाओं के मन में ढीले स्तनों (saggy breast) से संबंधी कई मिथक हैं। इसके अलावा, वे सोशल मीडिया और विज्ञापनों से भी भम्रित होती हैं, जिनमें स्तनों के आकार के परिवर्तन संबंधी दावे किए जाते हैं। इसी कारण, यह आवश्यक है कि इन मिथकों की वास्तविकता सामने लाई जाए ताकि महिलाओं को अधिक समस्याओं का सामना न करना पड़े। ढीले स्तनों संबंधी 5 मिथकों की वास्तविकता नीचे दी गई है:
स्तनपान से ढीले स्तन होते हैं
हालांकि, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन और वजन में परिवर्तन जैसी समस्याएं होती हैं, जिनका असर उनके स्तनों पर भी पड़ता है, लेकिन इस तथ्य- स्तनपान से ढीले स्तन होते हैं के कोई वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

क्रीम का इस्तेमाल करने से स्तन कस जाती हैं
डॉ. कश्यप दक्षिण, जनरल फिजिशियन, मुंबई, महाराष्ट्र बताते हैं, “हालांकि, बाजार में बहुत सारे उत्पाद उपलब्ध हैं जो ढीले स्तनों को कसने या उनके आकार को बढ़ाने का दावा करते हैं लेकिन तेल, क्रीम या लोशन आदि से स्तनों में परिवर्तन की पुष्टि करने वाले वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।” इसके अतिरिक्त, ऐसा देखा गया है कि स्तन की मालिश करने से रक्त परिसंचरण में सुधार हो सकता है, लेकिन इससे उनके आकार में परिवर्तन नहीं होता है।
व्यायाम करने से ढीले स्तनों की समस्या होती है
एक मिथक है कि दौड़ने और चलने जैसे व्यायाम ढीले स्तनों का कारण बन सकते हैं। इसके बावजूद, कुछ शोधकर्ताओं का दावा है कि इन व्यायामों को करने से ढीले स्तनों की समस्या नहीं होती है। अधिकांश विशेषज्ञ वर्कआउट करते समय महिला को एक अच्छी सपोर्टिव स्पोर्ट्स ब्रा पहनने की सलाह दी देते हैं ताकि व्यायाम का स्तनों पर प्रतिकूल असर न पड़े।
ब्रा न पहनना
ढीले स्तनों में ब्रा की कोई भूमिका नहीं होती है। इसके बावजूद, सही आकार की ब्रा पहनने से गर्दन या कंधे के दर्द जैसी समस्याएं कम हो जाती हैं।
ढीले स्तन किसी बीमारी का संकेत होती हैं
ढीले स्तनों से कोई भी महिला पीड़ित हो सकती है। यह समस्या आनुवंशिकता, हार्मोनल परिवर्तन, वजन में परिवर्तन आदि जैसे कई कारकों के कारण हो सकती है। ध्यान दें- यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होती हैं।
ढीले स्तनों का उपचार किया जा सकता है?
याद रखें कि ढीले स्तन (Saggy breast) कोई बीमारी नहीं है और न यह स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का कारण बन सकते हैं। इसी कारण, इसके लिए उपचार करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके बावजूद, अगर कोई महिला अपने स्तन के आकार में बदलाव करना चाहती है, तो वह सर्जरी का सहारा ले सकती है। हालांकि, स्तनों के आकार में बदलाव करने का एकमात्र विकल्प सर्जरी है, लेकिन ऐसे कुछ तरीके हैं, जो इन्हें प्रभावित कर सकते हैं।
वजन में परिवर्तन का असर शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है। इनमें स्तन भी शामिल हैं। इसके परिणास्वरूप ढीले स्तनों की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अत: स्वस्थ वजन बनाए रखने से स्तन का आकार सामान्य रह सकता है। इसके अलावा, त्वचा को मॉइस्चराइज करने से त्वचा की लोच को बनाए रखने में मदद मिलती है।
ढीले स्तनों के लिए व्यायाम
जैसा कि ऊपर बताया गया है, व्यायाम करने से स्तनों का आकार नहीं बदलता है। हालांकि, कुछ व्यायाम इन्हें सुढौल बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ये स्तनों और शरीर को टोन करने का एक करागर तरीका है। इस स्थिति में, पुशअप, चेस्ट प्रेस, चेस्ट फ्लाई, पुलओवर, डिप्स, वॉल प्रेस और प्लैंक जैसे व्यायाम किए जा सकते हैं। इसके अलावा, अगर किसी महिला को किसी विशिष्ट आकार के स्तनों की चाह है, तो वह प्लास्टिक सर्जन से परामर्श ले सकते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि मानव शरीर प्राकृति की सबसे सुंदर रचनाओं में से एक है। इसके बावजूद, अगर कोई महिला ढीले स्तनों की वजह से परेशान है या इसका असर उसके आत्मविश्वास पर पड़ता है तो वह स्तन के आकार को बढ़ाने वाली सर्जरी करा सकती है।
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