जानिए कोका-कोला को और आपके स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को

गर्मियों की शुरुआत होते ही दुकानों पर कोका-कोला जैसे कई तरह के पेय सजने शुरू हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से सबसे पसंदीदा पेय कोका-कोला की खोज किसने की, और यह हमारे शरीर के लिए कितना लाभकारी या कितना हानिकारक है? अगर नहीं जानते तो चलिए इसके बारे में विस्तार से बताते हैं-

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Last Updated on नवम्बर 9, 2023 by Neelam Singh

कोका-कोला या कोक का आविष्कार 19वीं शताब्दी के अंत में जॉर्जिया, संयुक्त राज्य अमेरिका के एक फार्मासिस्ट जॉन स्टिथ पेम्बर्टन द्वारा किया गया था। पेम्बर्टन एक औषधीय पेय और तंत्रिका उत्तेजक बनाने पर काम कर रहे थे, जिसका उद्देश्य एक ताज़ा और स्फूर्तिदायक पेय विकसित करना था। 1886 में पेम्बर्टन ने कोका के पत्तों और कोला नट्स को मिलाकर एक पेय का सफलतापूर्वक निर्माण किया। उन्होंने इन जड़ी-बूटियों को वेनिला और विभिन्न मसालों सहित अन्य स्वादों के साथ मिलाया। फिर उन्होंने उन्हें कार्बोनेटेड पानी के साथ मिलाकर एक फ़िज़ी (fizzy) स्वाद वाला पेय बनाया।

8 मई 1886 को पेम्बर्टन के सहायक, फ्रैंक एम. रॉबिन्सन ने दो प्राथमिक अवयवों को मिलाकर ‘कोका-कोला’ नाम का सुझाव दिया। रॉबिन्सन ने प्रतिष्ठित कोका-कोला लिपि लोगो भी तैयार किया जो आज भी उपयोग किया जाता है।

कोका-कोला के पोषण संबंधी तथ्य

कोका-कोला या कोक की 200 मिलीलीटर के मिश्रण में लगभग 88 किलो कैलोरी, 21.8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 21.2 ग्राम चीनी और 17 मिलीग्राम सोडियम प्रदान करती है।

कोका-कोला की सामग्री में कार्बोनेटेड पानी, चीनी, एक अम्लता नियामक (सोडियम साइट्रेट-338) कैफीन (8.7 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम) कारमेल रंग (150 D) और अन्य प्राकृतिक स्वादिष्ट पदार्थ शामिल हैं।

कोका-कोला के लाभ

कोका-कोला आज के समय में लोगों का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला पेय है। हांलाकि दुनिया भर कई वैज्ञानिक इसके कई तरह के शारीरिक नुकसान के बारे में बताते हैं लेकिन इसके कुछ लाभ भी होते हैं जिनके बारे में हम आपको विस्तार से बताते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके लाभों के बारे में-

ताज़ा स्वादः कोका-कोला अपने स्फूर्ति देने वाले ताज़ा स्वाद के लिए जाना जाता है। जो इसे पीना पसंद करते हैं यहां उन लोगों के लिए एक ख़ुशी की बात यह है कि इसको पीने के बाद न केवल स्फूर्ति का एहसास होता है बल्कि मन को भी शांति मिलती है।

मानसिक उत्तेजना में वृद्धि:  कुछ व्यक्तियों को कोका-कोला का सेवन करते समय अस्थायी रूप से मानसिक उत्तेजना में वृद्धि या आनंद की भावना का अनुभव होता है। यह इसके ख़ास स्वाद और कार्बोनेशन के कारण है। हालांकि ये प्रभाव व्यक्तिपरक होते हैं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं।

एनर्जी बूस्टर: कोका-कोला में कैफीन होता है, जो एक उत्तेजक है जो सतर्कता बढ़ा सकता है और एनर्जी बूस्ट प्रदान करता है। 

सामाजिक जुड़ावः कोका-कोला का अक्सर सामाजिक परिवेश में आनंद लिया जाता है। यह सकारात्मक सामाजिक संचार और दूसरों के साथ संबंध की भावना को बढ़ाने में भी योगदान देता है।

कोका कोला से जुड़ी हानियां

चीनी की ज्यादा मात्रा: कोका-कोला में उच्च मात्रा में चीनी होती है। प्रति 200 मिलीलीटर बोतल, कोका-कोला में आमतौर पर लगभग 21.2 ग्राम चीनी होती है। अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन करने से वजन बढ़ता है, दांतों की सड़न हो सकती है और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इन बीमारियों में मुख्य रूप से मोटापा, टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग शामिल हैं।

खाली कैलोरीः कोका-कोला ‘खाली कैलोरी (empty Calorie)’ से भरा होता है क्योंकि इसमें विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है। बिना संयम के कोका-कोला जैसे शर्करा युक्त पेय पदार्थों का नियमित सेवन असंतुलित आहार की श्रेणी में आता है।

दांतों के लिए भी है हानिकारक: कोका-कोला के बार-बार सेवन से दांतों के सड़ने और गुहाओं का खतरा बढ़ता है। उच्च चीनी की मात्रा मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया को अनुकूलित स्थान प्रदान करती है, जिससे दांतों की बीमारियां होती हैं।

Coke और Diet Coke?

डायट कोक कोका-कोला के समान ही स्वादिष्ट और स्फूर्तिदायक पेय है, लेकिन इसमें कोई चीनी नहीं होती है। अपने अनूठे स्वाद के साथ, डायट कोक में कैलोरी की मात्रा 1 कैलोरी से भी कम होती है, जो इसे अपने कैलोरी सेवन के प्रति जागरूक व्यक्तियों के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनाता है।

Diet coke की एक 200 मिलीलीटर की मात्रा लगभग 0 कैलोरी, 0 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0 ग्राम अतिरिक्त चीनी और 16 मिलीग्राम सोडियम प्रदान करती है।

सामग्री सूची 

डायट कोक में कार्बोनेटेड पानी, अम्लता नियामक (सोडियम साइट्रेट-338, और पोटेशियम साइट्रेट-331 (iii)) मिठास (एस्पार्टम-951 और एसिसल्फेम पोटेशियम-950) संरक्षक (सोडियम बेंजोएट-211) कैफीन (10 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम) कारमेल रंग (150 D) और प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त स्वाद शामिल हैं।

डायट कोक के लाभ

किसी भी कोक को पीने से पहले हमें उसके लाभ और हानि के बारे में जरूर जान लेना चाहिए. इनसे होने वाले लाभ या हानि लम्बे समय के बाद भी अपना असर दिखा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं डायट कोक के लाभ और हानि-

कम से कम कैलोरीः डायट कोक में शून्य कैलोरी होती है, जो इसे उन व्यक्तियों के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनाती है जो अपने कैलोरी सेवन को कम करना चाहते हैं या अपने वजन को बढ़ने से रोकना चाहते हैं तो यह बेहतर विकल्प है।

शुगर-फ्रीः डायट कोक चीनी-मुक्त है, जो उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो अपनी चीनी की खपत को सीमित करना चाहते हैं, विशेष रूप से मधुमेह वाले व्यक्ति या कम चीनी वाले आहार का पालन करने वाले व्यक्ति।

ताज़ा स्वादः डायट कोक नियमित कोका-कोला के समान स्वाद प्रदान करता है लेकिन चीनी की मिठास के बिना, उन लोगों के लिए एक ताज़ा पेय विकल्प प्रदान करता है जो स्वाद का आनंद लेते हैं।

डायट कोक के नुकसान

डायट कोक के लाभ के साथ कई नुकसान भी होते हैं। हालांकि कोई भी पेय अनियमित मात्रा में लेने से शारीरिक हानि होना स्वाभाविक है लेकिन फायदे देने वाले इस डायट कोक के नुकसान हैं तो चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं-

आर्टिफिशियल स्वीटनर्सः डायट कोक में एस्पार्टम और एसिसल्फेम पोटेशियम जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर्स होते हैं। जबकि इन आर्टिफिशियल स्वीटनर्स को नियामक निकायों द्वारा उपयोग के लिए अनुमोदित किया जाता है, कुछ व्यक्तियों को उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों या उनके प्रति संवेदनशीलता के बारे में चिंता हो सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कृत्रिम मिठास एस्पार्टेम के संभावित कैंसर पैदा करने वाले गुणों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट का आकलन करने की संभावना भी बताई है।

कैफ़ीनः नियमित कोका-कोला की तरह डायट कोक में भी कैफ़ीन होता है। जबकि मध्यम कैफीन का सेवन आम तौर पर अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित होता है, अत्यधिक सेवन से बेचैनी, हृदय गति में वृद्धि और कम नींद आने जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं, विशेष रूप से कैफीन के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों में।

दांतों के लिए हानिकारक: यह पेय भी दांतों के लिए हानिकारक है। अगर अधिक मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो यह दांतों को हानिकारक बैक्टीरिया के प्रति अनुकूलित बना देता है, जिस कारण दांतों के ख़राब होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

चीनी की लालसा पर प्रभावः कुछ शोध बताते हैं कि कृत्रिम मिठास, चीनी की तरह मस्तिष्क की लालसा को संतुष्ट नहीं कर सकती है, जिससे संभावित रूप से मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की लालसा बढ़ जाती है।

कार्सिनोजेनिक प्रभाव हो सकते हैंः कृत्रिम मिठास और कैंसर के जोखिम के बीच संबंध पर शोध से मिश्रित परिणाम मिले हैं। जबकि कुछ अध्ययन विशिष्ट कैंसर के जोखिम में मामूली वृद्धि को दर्शाते हैं, इसलिए यह कैंसर के प्रति बिलकुल सुरक्षित है इसका दावा अभी करना संभव नहीं है।

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Garima Dev Verman
A qualified and experienced dietitian, Garima is analyses and fact checks content around diet and nutrition.
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