जैसे-जैसे मधुमेह के मामले बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे चीनी रहित उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। इसमें मीठी तुलसी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है क्योंकि इसे कुछ दशकों से एक कैलरी रहित स्वीटनर के रूप में देखा गया है। कुछ विशेषज्ञ इसे मधुमेह रोगियों के लिए अपने रक्त शर्करा के प्रबंधन के लिए लाभकारी मानते हैं, लेकिन क्या यह मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी लाभकारी है? इस लेख में हमने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है।
क्या मीठी तुलसी (stevia) वास्तव में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है?
हां, मीठी तुलसी रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए कारगर हो सकती है; इसके बावजूद, इसे एक उपचार विकल्प नहीं माना जा सकता है।
मीठी तुलसी का मुख्य कारक इसमें कैलोरी का कम मात्रा में होना और इसका पौधे आधारित होना है। अध्ययनों से पता चला है कि स्टीविया में मौजूद स्टीवियोल ग्लाइकोसाइड इसकी मिठास के लिए जिम्मेदार हैं और उनके सेवन के बाद रक्त शर्करा में कोई वृद्धि नहीं होती है। वास्तव में, शोधकर्ताओं ने जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में एक अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि जो लोग चीनी की जगह मीठी तुलसी का सेवन करते हैं, उनमें भोजन के बाद रक्त शर्करा के स्तर में कमी हो सकती है। अत: यह मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक हो सकता है क्योंकि यह भोजन के बाद रक्त शर्करा में सुधार कर सकती है। इसके बावजूद इसकी मात्रा पर ध्यान देना आवश्यक है। अन्य सप्लीमेंट्स की तरह, मीठी तुलसी मधुमेह रोगियों को स्वस्थ आहार के साथ मिलाने पर उनके रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह मधुमेह को ठीक नहीं कर सकता है।
2023 में, WHO ने शरीर के वजन को नियंत्रित करने या NCD (गैर-संचारी रोग) के जोखिम को कम करने के लिए NSS (नॉन-शुगर स्वीटनर) का परहेज करने की सलाह दी है। गैर-संचारी रोग के प्रकार निम्नलिखित हैं:
- एसिसल्फेम के
- एस्पार्टेम
- एडवांटेम
- साइक्लेमेट्स
- नियोटेम
- सैकरिन
- सुक्रॉलोज
- स्टीविया और उसके व्युत्पन्न (derivatives)
ये आवश्यक पोषण में योगदान नहीं करते हैं और संतुलित आहार में इनकी आवश्यकता नहीं होती है। कुल मिलाकर, WHO सलाह देता है कि लोगों को शुरूआत से ही अपने आहार में चीनी का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रह सके।
क्या कोई शोध पत्र (research papers) हैं जिसमें स्टीविया की दक्षता का उल्लेख किया गया है?
हां, स्टीविया की प्रभावकारिता पर कुछ शोध उपलब्ध हैं। इनमें मुख्य रूप से मधुमेह या चयापचय संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों में गैर-चीनी स्वीटनर के प्रयोग का उल्लेख किया गया है। यहां कुछ अध्ययनों की जानकारी दी गई है जिसमें इसके प्रभावों का समर्थन किया गया है:
2020 के एक शोध परिणाम प्रदर्शित करते हैंः
- प्रतिभागियों के बीच फास्ट के रक्त शर्करा के स्तर में बेसलाइन से लेकर पाचन के दो घंटे बाद तक कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं है।
- इसके अलावा, जांच समूहों (test groups) के बीच इंसुलिन, HbA1C और लिपिड एकाग्रता अंतर को सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं माना गया था।
- इस अध्ययन के परिणामों से पता चलता है कि मीठी चाय में स्टीविया की जांच की गई खुराक मधुमेह के रोगियों के लिए रक्त शर्करा, HbA1C, इंसुलिन या लिपिड के स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना सुक्रॉलोज का बेहतर विकल्प हो सकती है।
2005 के एक अध्ययन से पता चलता है किः
स्टीवियोसाइड, स्टीविया का प्रमुख घटक, न केवल इंसुलिन के स्तर को बढ़ा सकता है बल्कि हेपेटिक ग्लूकोज उत्पादन को भी रोक सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक ग्लूकोज-प्रासंगिक जीन की अभिव्यक्ति को कम कर सकता है, जिससे एक एंटी-हाइपरग्लाइसेमिया प्रभाव पड़ सकता है।
2011 के एक अध्ययन का उद्देश्य टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में 2% स्टीविया लीफ पाउडर के साथ बनाई गई रोटी (गेहूं के आटे की रोटी) के ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) और रक्त ग्लूकोज-कम करने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करना था। GI निर्धारित करने के लिए छह प्रतिभागियों ने अलग-अलग दिनों में ग्लूकोज, रोटी और स्टीविया युक्त रोटी का सेवन किया था। इसके नतीजों से पता चलाः
- साधारण रोटी के लिए 71 और मीठी तुलसी की रोटी के लिए 62 का GI।
- 30 दिनों की अवधि में, मीठी तुलसी की रोटी के दैनिक सेवन से फास्ट (104 से 87.5 mg/dl) और पोस्टप्रैंडियल (250 से 183 mg/dl) रक्त शर्करा के स्तर में कमी हो सकती है। मीठी तुलसी को बंद करने के बाद, रक्त शर्करा का स्तर फिर से बढ़ सकता है।
क्या मीठी तुलसी का इंसुलिन उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है?
मीठी तुलसी इंसुलिन को सक्रिय करने के लिए चीनी की तरह काम नहीं कर सकती है।
यहां शर्करा और मीठी तुलसी के बीच अंतर यह है कि शरीर शर्करा के अवशोषण में इंसुलिन का प्रयोग करता है; यही कारण है कि शरीर रक्त शर्करा के स्तर को संतुलन में रखने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करता है। मीठी तुलसी का चयापचय अलग हो सकता है क्योंकि ऐसा जानवरों पर किए गए अधिकांश अध्ययनों के माध्यम से पता चलता है कि मीठी तुलसी अग्न्याशय को अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित नहीं करती है, जिससे स्टीविया इंसुलिन प्रतिरोध या टाइप 2 मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी हो सकती है। इसके बावजूद, मानव अध्ययनों के मिश्रित परिणाम दिखने को मिलते हैं। हालांकि मीठी तुलसी इंसुलिन में कम वृद्धि का उत्पादन कर सकती है इसलिए इंसुलिन संवेदनशीलता पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव के लिए अधिक शोध करने की आवश्यकता है।
क्या मीठी तुलसी कृत्रिम मिठास की तुलना में सुरक्षित है?
हां, यह अपेक्षाकृत सुरक्षित है क्योंकि मीठी तुलसी एक प्राकृतिक स्रोत है, इसके बावजूद इसे पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।
मीठी तुलसी की उत्पत्ति मुख्य रूप से स्टीविया रीबाउडियाना पौधे (Stevia rebaudiana plant) से होती है, यह सुक्रॉलोज या एस्पार्टम जैसे कृत्रिम की तुलना में एक “प्राकृतिक” स्वीटनर है। कई लोग इसे लाभकारी मानते हैं क्योंकि कुछ कृत्रिम मिठास स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को बढ़ा सकते हैं। यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा की गई एक समीक्षा में मीठी तुलसी को तब तक सुरक्षित माना गया है जब तक इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाता है। याद रखें कि “प्राकृतिक” का अर्थ सुरक्षित नहीं है (“natural” isn’t “risk-free”)। मीठी तुलसी सहित किसी भी स्वीटनर का अत्यधिक सेवन आंत के माइक्रोबायोम या इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है और उन प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है।
क्या मधुमेह प्रबंधन के लिए मीठी तुलसी (stevia) का सेवन करने के कोई दुष्प्रभाव हैं?
जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि मीठी तुलसी का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
हालांकि मीठी तुलसी का सीमित मात्रा में सेवन करना नुकसानदायक नहीं है लेकिन इस पर अत्यधिक निर्भर रहने से लोग ऐसा सोच सकते हैं कि सभी मीठे खाद्य पदार्थ, भले ही चीनी रहित हों नुकसानदायक हो सकते हैं। मधुमेह रोगियों के लिए, चीनी युक्त खाद्य पदार्थों की बजाय साबुत एवं पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना लाभकारी हो सकता है। मीठी तुलसी का अत्यधिक सेवन आपके स्वाद की क्षमता को भी कम कर सकता है, जिससे फलों और सब्जियों में प्राकृतिक शर्करा का स्वाद कम लग सकता है। पोषण विशेषज्ञ (Nutritionists) अक्सर एक संतुलित दृष्टिकोण की सलाह देते हैंः आहार में मीठी तुलसी का सेवन स्वास्थ्य के अनुकूल करना चाहिए न कि स्वादनुसार।
मीठी तुलसी (stevia) का सेवन कितना मात्रा में करना चाहिए?
मीठी तुलसी (stevia) की मात्रा आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर भिन्न हो सकती है। खाद्य योजकों पर संयुक्त विशेषज्ञ समिति के अनुसार, इसका सेवन शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम 4 mg तक करना उचित है। उदाहरण के लिए, 70 किलोग्राम वजन वाला व्यक्ति सुरक्षित रूप से प्रति दिन 280 mg मीठी तुलसी का सेवन कर सकता है। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी किसी समस्या से पीड़ित है तो उसे इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। इसके अलावा इसमें किसी चिकित्सक की सहायता भी ली जा सकती है।
निष्कर्ष
हालांकि मीठी तुलसी स्टीविया मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए एक सुरक्षित और चीनी का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है लेकिन यह मधुमेह को पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकती है। इसके अलावा चूंकि यह रक्त शर्करा के तीव्र परिवर्तन का कारण नहीं बन सकती है और पारंपरिक शर्करा की तरह इंसुलिन की मांग नहीं करती है इसलिए इसका सेवन अधिकांश लोग कर सकते हैं। इसके बावजूद मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अत: मधुमेह रोगियों के लिए, प्रभावी रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए स्वस्थ जीवन शैली के साथ-साथ एक संतुलित आहार में मीठी तुलसी का सेवन ध्यानपूर्वक करना महत्वपूर्ण है।
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