अस्थमा सिर्फ खांसी या कभी-कभी सांस फूलने की बीमारी नहीं है, यह आपकी ज़िंदगी को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है — विशेषकर 35 साल से अधिक उम्र के वयस्कों के लिए, जो काम, परिवार और रोज़मर्रा के तनाव के साथ-साथ अस्थमा अटैक को भी प्रबंधित करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से अधिकांश लोग इससे राहत पाने के लिए प्राकृतिक इलाज या घरेलू नुस्खों की ओर रुख करते हैं। ऐसा ही एक घरेलू उपाय है — प्याज। हाँ, वही प्याज जिसकी तेज़ गंध होती है और जिसे काटते समय आँखों से आँसू आ जाते हैं! अब लोग इसे श्वास संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में मददगार मानने लगे हैं, लेकिन क्या प्याज सच में अस्थमा के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है? आइए, इसे और अच्छे से समझते हैं।
क्या प्याज श्वास की समस्याओं (respiratory problems) वाले लोगों की मदद कर सकता है?
शायद। प्याज में विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सिडेंट और प्राकृतिक रसायन होते हैं, जो फेफड़ों को बेहतर काम करने में मदद कर सकते हैं और इन्फ्लेमेशन कम कर सकते हैं — ये दोनों श्वास की समस्याओं के मुख्य तत्व हैं।
विटामिन C
यह विटामिन फेफड़ों को प्रदूषण, धुआं या संक्रमण से होने वाले नुकसान से बचाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है, जो वायरस और बैक्टीरिया से लड़ती है।
क्वेरसेटिन
प्याज में क्वेरसेटिन नामक प्राकृतिक पदार्थ होता है, जो इन्फ्लेमेशन और एलर्जी के लक्षण कम कर सकता है। यह अस्थमा या एलर्जी वाले लोगों के लिए विशेष रूप से मददगार हो सकता है, जिनमें सांस फूलना या घरघराहट होती है।
सल्फर यौगिक
प्याज काटते समय जो तेज़ गंध और आंखों में आंसू आता है, वह सल्फर यौगिकों की वजह से होता है। ये यौगिक बैक्टीरिया से लड़ने और श्वास नली के इन्फ्लेमेशन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, ये पोषक तत्व मदद कर सकते हैं, लेकिन क्या प्याज सच में सांस की समस्याओं में राहत देता है? आइए देखें शोध से क्या पता चलता है।
क्या शोध से पता चलता है कि प्याज अस्थमा को रोकने में मदद कर सकता है?
हाँ, कुछ शोध से पता चलता है कि प्याज मदद कर सकता है। प्याज में प्राकृतिक रसायन होते हैं, विशेषकर एक जो क्वेरसेटिन कहलाता है, जो इन्फ्लेमेशन और एलर्जी को कम करने में मदद करता है। चूंकि, अस्थमा सांस की नलियों में इन्फ्लेमेशन की वजह से होता है इसलिए जो भी इन्फ्लेमेशन कम करे, वह मददगार हो सकता है।
प्रयोगशाला और जानवरों पर हुए अध्ययनों से पता चला है कि क्वेरसेटिन उन रसायनों को कम करता है जो एलर्जी और सांस की नली के संकुचन के लिए जिम्मेदार होते हैं — ये दोनों अस्थमा में आम हैं। उदाहरण के लिए, 2013 के एक अध्ययन से पता चलता है कि क्वेरसेटिन ने जानवरों की सांस की मांसपेशियों को आराम दिया, जो अस्थमा वालों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
2021 के एक और अध्ययन से पता चलता है कि जिन लोगों को ज्यादा क्वेरसेटिन मिलता है, उन्हें अस्थमा के लक्षण कम होते हैं और अस्थमा होने का खतरा भी कम होता है।
प्याज में एक खास रसायन होता है जिसे डाइफेनिलथायोसुल्फिनेट कहते हैं। यह रसायन प्रयोगशाला में इन्फ्लेमेशन को कम करने में कुछ दवाइयों से भी ज्यादा असरदार पाया गया है। इसका अर्थ है कि प्याज में मौजूद ये रसायन अस्थमा जैसी बीमारियों में होने वाले इन्फ्लेमेशन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
2024 के एक अध्ययन से पता चलता है कि प्याज के अर्क में अस्थमा जैसे लक्षण कम करने, इन्फ्लेमेशन घटाने और श्वास की नलियों को बेहतर बनाने में मदद करता है। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्याज खाने या उसके अर्क का इस्तेमाल करने से इंसानों में अस्थमा ठीक हो सकता है। इसलिए, प्याज फेफड़ों की सेहत को सपोर्ट कर सकता है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, लेकिन यह अस्थमा या सांस की अन्य समस्याओं का सटीक इलाज नहीं है। इसके लिए और शोध की जरूरत है।
क्या अस्थमा के मरीज़ों को रोज़ाना प्याज खाना चाहिए?
हाँ, लेकिन ज़्यादा उम्मीदें न रखें। रोज़ाना खाने में प्याज शामिल करना आमतौर पर सुरक्षित, सस्ता और श्वसन स्वास्थ्य (respiratory health) के लिए फायदेमंद हो सकता है। यह स्वाद बढ़ाने का एक अच्छा तरीका भी है, वो भी बिना ज़्यादा नमक या प्रोसेस्ड मसालों के।
अगर आपको श्वास संबंधी समस्या है, तो सिर्फ प्याज पर निर्भर न रहें। प्याज को एक “अस्थमा-फ्रेंडली” डाइट का हिस्सा मानें, जिसमें फल, सब्ज़ियाँ, ओमेगा-3 से भरपूर चीज़ें (जैसे अलसी या मछली) और भरपूर पानी शामिल हो।
अगर आप दवा लेते हैं या इनहेलर का प्रयोग करते हैं, तो उसे बंद न करें। प्याज दवा का विकल्प नहीं है। लेकिन अगर आपकी उम्र 35 साल से ज़्यादा है और आप अस्थमा से जूझ रहे हैं, तो रोज़ के खाने में प्याज शामिल करना सेहत को बेहतर रखने का एक आसान और प्राकृतिक तरीका हो सकता है।
निष्कर्ष
प्याज कोई जादुई दवा नहीं है, लेकिन इसमें ऐसे गुण होते हैं जो फेफड़ों को मजबूत बनाने और इन्फ्लेमेशन को कम करने में मदद करते हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए यह थोड़ी सी लेकिन फायदेमंद मदद हो सकती है। ध्यान रहे – खाना तभी सबसे ज्यादा असर करता है जब आप दवाओं, डॉक्टर की सलाह और सही जीवनशैली के साथ उसका सही इस्तेमाल करें। यही सब मिलकर फेफड़ों की सही देखभाल करते हैं।
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