एंडोमेट्रियल कैंसर को गर्भाशय कैंसर के रूप में भी जाना जाता है। यह महिलाओं को होने वाले प्रमुख कैंसरोंं में से एक है।
गर्भाशय एक नाशपाती के आकार का अंग है, जो महिला प्रजनन प्रणाली (reproductive system) का एक अभिन्न अंग है। यह गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की उत्पत्ति का स्थान है। गर्भाशय में ऊतक की तीन परतें-एंडोमेट्रियम, मायोमेट्रियम और पेरिमेट्रियम होती हैं।
चूंकि, गर्भाशय का कैंसर आमतौर पर एंडोमेट्रियल परत से ही शुरू होता है, इसलिए इसे एंडोमेट्रियल कैंसर कहा जाता है।
एंडोमेट्रियल कैंसर के संकेत और लक्षण
जैसा कि पहले बताया गया है कि एंडोमेट्रियल कैंसर गर्भाशय की सबसे अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम से शुरू होता है।
चूंकि, एंडोमेट्रियल अस्तर (endometrial lining) कई रक्त वाहिकाओं और संयोजी ऊतकों से बना होता है, जिसकी वजह से मासिक धर्म (Periods) होता है। गर्भाशय कैंसर के लक्षण निम्नलिखित हैंः
- मासिक धर्म चक्र (Periods) के दौरान रक्तस्राव
- रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव
- श्रोणि दर्द पीरियड्स के दौरान भारी रक्तस्राव
- भूख न लगना
- थकान
- मतली
- अचानक से वजन घटाना
- पैरों और पीठ में दर्द
- पेशाब करते समय खून आना
- यौन क्रिया के दौरान दर्द
- पेट के निचले हिस्से में गांठ
- भारी और अशुद्ध योनि स्राव
एंडोमेट्रियल कैंसर के कारण
आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि गर्भाशय कैंसर केवल महिलाओं को ही हो सकता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि ट्रांस-पुरुष और गैर-द्विआधारी लोगों (non-binary people) में भी यह कैंसर देखने को मिला है।
एस्ट्रोजन का उच्च स्तर एंडोमेट्रियल ऊतक के विकास का कारण बनता है। इस प्रकार गर्भाशय कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। निम्नलिखित कारक शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर में वृद्धि का कारण बन सकते हैंः
- मोटापा
- रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल प्रतिस्थापन थेरेपी (Hormonal replacement therapy)
- पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम
अन्य कारक जो इस कैंसर का कारण बन सकते हैं, निम्नलिखित हैं:
- आयुः यह आमतौर पर 40 वर्ष की आयु से अधिक महिलाओं में रजोनिवृत्ति के समय के आसपास विकसित होता है।
- मधुमेह
- कैंसर का पारिवारिक इतिहास
- रेडिएशन एक्सपोजर
- लिंच सिंड्रोम जैसे आनुवंशिक विकार
- टेमोक्सीफेन की दवा का इतिहास
- पहले गर्भधारण न करना
- देर से रजोनिवृत्ति होना
एंडोमेट्रियल कैंसर होने के चरण
ट्यूमर का प्रसार मुख्य रूप से चार चरणों में होता है:
- चरण 1- कैंसर अभी भी गर्भाशय के भीतर है और आस-पास के अंगों में इसका प्रसार नज़र नहीं आ रहा है।
- चरण 2- कैंसर गर्भाशय ग्रीवा तक फैल गया है।
- चरण 3- कैंसर गर्भ के बाहर श्रोणि या लिम्फ नोड्स में आस-पास के ऊतकों में फैल गया है।
- चरण 4- कैंसर पेट के नरम ऊतकों, या अन्य अंगों, जैसे मूत्राशय (bladder), आंत्र (bowel), यकृत, या फेफड़ों में फैल गया है।
एंडोमेट्रियल कैंसर का पता लगाना
- श्रोणि की शारीरिक जांचः डॉक्टर दोनों हाथों के बीच गर्भाशय को महसूस करने के लिए योनि में उंगलियां डालकर और दूसरे हाथ को पेट के ऊपर रखकर गर्भाशय की जांच करते हैं।
- ट्रांसवैजिनल USG स्कैनः ट्रांसड्यूसर नामक एक छोटा उपकरण योनि में डाला जाता है जो उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों का उत्सर्जन करता है। इन तरंगों का परावर्तन किसी भी ट्यूमर को देखने में मदद करता है।
- हिस्टेरोस्कोपीः कैमरे समेत एक छोटी ट्यूब को गर्भाशय के अंदर डाला जाता है और पूरे अस्तर (entire lining) की अच्छी तरह से जांच की जाती है ताकि किसी भी असामान्य ऊतक वृद्धि का पता लगाया जा सकता है। सूक्ष्म जांच (microscopic examination) के लिए ऊतक का एक छोटा सा नमूना भी लिया जाता है।
- बायोप्सीः हिस्टेरोस्कोपिक जांच करते हुए लिए गए छोटे ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के तहत जांच के लिए भेजा जाता है। इस प्रकार, कैंसर कोशिकाओं का पता लगाया जाता है।
- फैलाव और क्यूरेटेजः गर्भाशय ग्रीवा को फैलाया जाता है और गर्भाशय की आंतरिक दीवारों को ऊतक प्राप्त करने के लिए स्क्रैप किया जाता है जिसकी सूक्ष्मदर्शी के तहत जांच की जा सकती है।
- रक्त जांच: रक्त जांच (blood test) कुछ ट्यूमर मार्करों के लिए किया जा सकता है जो कैंसर कोशिकाओं द्वारा स्रावित विशेष प्रोटीन हैं।
उपरोक्त जांचों के अलावा अन्य जांच भी की जा सकती है, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
- सीटी स्कैन- ट्यूमर के स्थान और फैलाव का पता लगाना
- MRI- कैंसर के ऊतक की सीमा का अनुमान लगाना
- PET- CT- मेटास्टेसिस के क्षेत्रों और विस्तार का पता लगाना
एंडोमेट्रियल कैंसर संंबंधी जटिलताएँ
चूंकि, गर्भाशय कैंसर रक्तस्राव का कारण बनता है, इसलिए यह खून की कमी (Anaemia) का कारण बन सकता है, जिसकी वजह से थकान, धड़कन, सिरदर्द जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
एंडोमेट्रियल कैंसर का इलाज
एंडोमेट्रियल कैंसर का इलाज मुख्य रूप से कैंसर के प्रकार, ऊतक, मेटास्टेसिस की उपस्थिति आदि पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त, इसके इलाज के लिए विभिन्न उपचार तरीकों को अपनाया जाता है:
- सर्जरी: अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब वाले गर्भाशय को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है।
- कीमोथेरेपीः कैंसर रोधी दवाएं या तो अंतःशिरा या मौखिक रूप से दी जा सकती हैं जो शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं।
- रेडियोथेरेपीः उच्च ऊर्जा से युक्त तरंगों को शरीर में डाला जाता है, ताकि हानिकारक कोशिकाओं को नष्ट किया जा सके।
- इम्यूनोथेरेपीः रोगी को कुछ एंटीबॉडी दी जाती हैं ताकि उसका शरीर कैंसर कोशिकाओं का सामना कर सके।
- दवाएंः गर्भाशय कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं।
- हार्मोन थेरेपीः गर्भाशय की कैंसर कोशिकाओं में हार्मोन-निर्भर वृद्धि (hormone-dependent growth) होती है, जिसका अर्थ है कि यदि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की आपूर्ति बंद हो जाती है, तो यह ट्यूमर के विकास को रोक सकती है।
एंडोमेट्रियल कैंसर से रोकथाम
हालांकि, एंडोमेट्रियल कैंसर एक गंभीर रोग है जिसकी वजह से असहनीय दर्द समेत विभिन्न समस्याएं हो सकती हैं। इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि निम्नलिखित तरीकों को अपनाकर इससे रोकथाम संभव है:
- संतुलित आहार और उपयुक्त BMI बनाए रखना।
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहें/ व्यायाम करना
- गर्भनिरोधक उपाय के रूप में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी जोखिम को कम करता है।
- रजोनिवृत्ति के बाद बहुत लंबे समय तक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी कराने से बचें।
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