पैलियो डाइट को पेलियोलिथिक या ‘केवमैन’ डाइट के नामों से जाना जाता है। इसका सेवन पुरापाषाण युग (Palaeolithic Age) में भी किया जाता था। इसमें आमतौर पर पतला मांस, मछली, फल, सब्जियां, मेवे और बीज का सेवन और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (processed foods), अनाज, फलियां और डेयरी उत्पाद का परहेज किया जाता है।
पैलियो डाइट क्या है?
पैलियो डाइट या पेलियोलिथिक आहार, एक आहार नियम है जिसमें पुरापाषाण युग (Palaeolithic Age) के आहार का पालन किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, अनाज, फलियों और डेयरी उत्पादों के बजाय, पतले मांस, मछली, फल, सब्जियां, मेवे और बीज जैसे अप्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (unprocessed foods) का सेवन किया जाता है। इस आहार या डाइट का प्रमुख उद्देश्य प्राचीन युग संबंधी आहार के पौष्टिक तत्वों को आधुनिक खाद्य पदार्थों में शामिल करना है ताकि समग्र स्वास्थ्य में सुधार किया जा सके।
पैलियो डाइट की शुरूआत कब हुई थी?
पैलियो डाइट का विषय सर्वप्रथम 1970 के दशक में प्रकाश में किया लेकिन इसे औपचारिक रूप से प्रस्तुत 1980 के दशक में किया गया था। इसका श्रेय स्वास्थ्य और व्यायाम विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. लॉरेन कॉर्डैन को दिया जाता है, जिन्होंने 2002 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘द पेलियो डाइट’ में इस पर विस्तार से चर्चा की।
पैलियो डाइट के स्वास्थ्य संबंधी लाभ क्या हैं?

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि पैलियो डाइट का सेवन मुख्य रूप से पुरापाषाण काल में किया जाता था। इसका मुख्य रूप कारण इससे विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त होना है। अत: यदि कोई व्यक्ति पैलियो डाइट का सेवन या पालन करता है, तो उसे निम्नलिखित स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त हो सकते हैं:
वजन कम करना और पेट भरने की भावना में सुधारः
चूंकि, पैलियो डाइट में प्रोटीन और कैलोरी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है, इसलिए शरीर में कैलोरी की खपत कम होती है। इसके परिणामस्वरूप, वजन कम करने में सहायता मिलती है।
प्रोटीन और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों की वजह से अत्यधिक भूख लगाने की संभावना कम हो सकती है।
रक्त शर्करा स्तर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना:
परिष्कृत शर्करा और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का परहेज करने से रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य किया जा सकता है।
साबुत, असंसाधित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार हो सकता है। इससे संभावित रूप से टाइप 2 मधुमेह या इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों को लाभ प्राप्त हो सकता है।
हृदय स्वास्थ्य में सुधार करना:
अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और ट्रांस वसा का कम सेवन करने से हृदय रोग का जोखिम कम हो सकता है।
स्वस्थ वसा (जैसे मछली और मेवों से ओमेगा-3 फैटी एसिड) से भरपूर और फलों तथा सब्जियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट से हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
पाचन स्वास्थ्य को बेहतर करना:
फाइबर युक्त फलों और सब्जियों का सेवन करने से आंत स्वास्थ्य और शौच प्रक्रिया में सुधार हो सकता है।
अनाज और फलियों का परहेज ग्लूटेन और लेक्टिन के प्रति संवेदनशीलता या असहिष्णुता रोगियों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
सूजन को कम करना:
पैलियो डाइट मुख्य रूप से मछली, सब्जियां, फल, मेवे और बीज जैसे सूजनरोधी खाद्य पदार्थों से भरपूर होती है।
प्रसंस्कृत और अत्यधिक शर्करा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करने से शरीर में मौजूद सूजन को कम करने में सहायता मिलती है।
हालांकि, अधिकांश लोगों को उपरोक्त लाभ प्राप्त हो सकते हैं लेकिन इसके वैज्ञानिक साक्ष्य के परिणाम विभिन्न हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इसका पालन लंबे समय करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती है। अत: इसका सेवन आहार विशेषज्ञ (dietitian) की सलाह पर ही करना चाहिए।
पैलियो डाइट के दुष्प्रभाव क्या हैं?
किसी भी अन्य डाइट या आहार योजना की भांति पैलियो डाइट के भी कुछ दुष्प्रभाव होते हैं। अत: इसका सेवन करने से पहले निम्नलिखित दुष्प्रभावों की जानकारी होनी चाहिए:
पोषक तत्वों की कमीः
- कैल्शियम और विटामिन डीः डेयरी उत्पादों का परेहज करने से कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हो सकती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रतिबंधात्मक संरचना (Restrictive Nature):
- खाद्य विविधता– साबुत खाद्य समूहों (अनाज, फलियां और डेयरी) का सख्त उन्मूलन आहार को नीरस और लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने के लिए चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
- सामाजिक और सांस्कृतिक कारकः इस आहार के कुछ सख्त नियम होते हैं, जिसके कारण बाहर भोजन करने या सामाजिक समारोहों में भाग लेना मुश्किल बना सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप अकेलपन की भावना उत्पन्न हो सकती है।
मैक्रोन्यूट्रिएंट्स के असंतुलित होने की संभावना:
- उच्च प्रोटीन और वसा का सेवनः इसमें प्रोटीन और वसा का अत्यधिक सेवन हो सकता है, जिससे गुर्दे रोगी समेत अन्य रोगियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती है।
- कम कार्बोहाइड्रेट का सेवनः कार्बोहाइड्रेट में कमी से शारीरिक ऊर्जा का स्तर कम हो सकता है। यह समस्या मुख्य रूप से एथलीटों या अत्यधिक सक्रिय लोगों में देखने को मिल सकती है।
वैज्ञानिक सहमति की कमी:
- दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावः इस आहार के स्वास्थ्य प्रभावों पर सीमित शोध हैं। कुछ अध्ययनों में इसके संभावित लाभों का दावा किया गया है, लेकिन अन्य में इसके जोखिमों/ दुष्प्रभावों का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, मांस का सेवन अत्यधिक मात्रा में करने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि हो सकती है।
अव्यवस्थित भोजन का जोखिमः
- ऑर्थोरेक्सिया (Orthorexia): इसके सख्त नियम और ‘स्वच्छ भोजन’ पर अत्यधिक जोर देने से भोजन की गुणवत्ता और शुद्धता संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से ऑर्थोरेक्सिया या अन्य भोजन संबंधी विकार हो सकते हैं।
इन दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए ऐसे आहार का सेवन करना महत्वपूर्ण है, जो पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करे। इसके अलावा, अपने आहार में परिवर्तन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है।
पैलियो डाइट के नियम क्या हैं?
पैलियो डाइट में निम्नलिखित नियमों का पालन सख्ती से किया जाता है:
- संपूर्ण खाद्य पदार्थों (Whole Foods) का सेवन करना: ताजे फल, सब्जियां, मेवे, बीज, पतला मांस, मछली और अंडे।
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Processed Foods) का परहेज करना: किसी परिष्कृत शर्करा या कृत्रिम योजक का सेवन न करना।
- अनाज और फलियों का सेवन न करना: गेहूं, चावल, सेम या दाल का सेवन न करना।
- डेयरी उत्पादों का परहेज करना: अधिकांश डेयरी उत्पादों का परहेज करना।
- स्वस्थ वसा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना: एवोकैडो, मेवे, बीज, जैतून का तेल और मछली का तेल।
- पशु उत्पादों का सेवन मुख्य रूप से करना: इस आहार में पशु उत्पादों का सेवन मुख्य रूप से किया जाता है।
- रिफाइंड तेलों का परहेज करना: ट्रांस फैट, मार्जरीन या वनस्पति तेल से भरपूर खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना।
पैलियो डाइट का पालन किसे नहीं करना चाहिए?
हालांकि, यह अधिकांश लोगों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है लेकिन यह कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकते हैं। इनमें गुर्दे की बीमारी/गुर्दे की पथरी से पीड़ित रोगी शामिल हैं। इसका प्रमुख कारण प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना है। इसके अतिरिक्त, भोजन विकार से पीड़ित व्यक्ति के लिए इसका सेवन करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों में कैल्शियम जैसे विशिष्ट पोषक तत्वों की कमी है, उनके लिए डेयरी उत्पादों का सेवन न करने से यह समस्या बढ़ सकती है। ध्यान दें: गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आहार परिवर्तन करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। अत: हमें उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ना आपके लिए लाभकारी साबित हुआ होगा।
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