मानसून का मौसम अपने साथ विभिन्न बीमारियां का खतरा भी लेकर आता है। इसमें बुखार भी शामिल है। ऐसा देखा गया है कि मौसम परिवर्तन का असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और यदि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत न हो तब हमारे बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। जब आप बीमार होते हैं, तब सही आहार आपके ठीक होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह बात बुखार पर भी लागू होती है। इससे निजात पाने या उभरने में विभिन्न कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन कारकों में से एक आहार भी है। आहार आपको न केवल आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है बल्कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है, जिसके परिणामस्वरूप आप जल्दी से ठीक होते हैं। इस लेख में हमने बुखार होने पर किस तरह का आहार करना चाहिए की जानकारी दी है, इसलिए इसे पूरा पढ़ें।
बुखार क्या है?
जब मानव शरीर का तापमान 100.4 ° F (38 ° C) से अधिक हो जाता है, तब उस स्थिति को बुखार कहा जाता है। यह किसी रोग या संक्रमण की वजह से भी हो सकता है। यह वायरस और बैक्टीरिया जैसे रोगजनकों से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। जब शरीर को किसी संक्रमण का पता चलता है, तब मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस इन हानिकारक बैक्टीरिया के लिए कम आतिथ्यशील वातावरण (elevated temperature) बनाने के लिए शरीर के तापमान को बढ़ाता है। यह उच्च तापमान आमतौर पर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ा सकता है, जिससे शरीर के लिए संक्रमण से लड़ना आसान हो जाता है।
बुखार के प्रकार क्या हैं?
बुखार आमतौर पर एक सामान्य स्थिति है जो विभिन्न रोगों से उत्पन्न हो सकती है। यह अक्सर संक्रमण, ऑटोइम्यून विकार, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विकार और घातकताओं (malignancies) के साथ-साथ हृदय और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों से संबंधित हो सकती है। बुखार को उनकी अवधि और गंभीरता के आधार पर तेज और पुराने प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
तेज बुखार
तेज बुखार कम समय के लिए होता है, जो संक्रमण की वजह से हो सकता है। इसकी वजह से शरीर का तापमान अधिक बढ़ सकता है, उदाहरण के लिए 104°F (40°C) से ऊपर। इसके सामान्य कारणों में टाइफाइड, डेंगू बुखार, टॉन्सिलिटिस (tonsillitis), फ्लू (influenza), चेचक, निमोनिया और कुछ परजीवी (parasitic) रोग जैसे संक्रमण शामिल हैं।
पुराना बुखार
पुराना बुखार आमतौर पर तीन सप्ताह या उससे अधिक समय तक रह सकता है और शरीर का तामपान एकसामान अर्थात् फारेनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) से अधिक नहीं होता है। यह समस्या मुख्य रूप से तपेदिक (tuberculosis) या HIV/AIDS जैसे संक्रमणों, या तनाव, पुरानी जठरांत्र संबंधी बीमारियों, कैंसर और गंभीर कुपोषण के कारण हो सकती है।
Fever of Unknown Origin (FUO)
जब बुखार बिना किसी स्पष्ट कारण के तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहता है, तो इसे अज्ञात मूल का बुखार या Fever of Unknown Origin (FUO) कहा जाता है। इसे आमतौर पर AIDS, कुछ संक्रमण, लिम्फोमा या हिस्टोप्लाज्मोसिस जैसी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है।
बुखार में किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए?
शरीर में विभिन्न चयापचय परिवर्तनों के कारण बुखार का पोषण की स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। यहाँ विभिन्न प्रकार के बुखार का आहार प्रबंधन दिया गया हैः
तेज बुखार का आहार प्रबंधन
पोषक तत्वों की आवश्यकताएँः
ऊर्जाः
- उच्च BMR और मांसपेशियों/वसा की क्षति के कारण RDI से 10-20% ऊपर सेवन बढ़ाना।
- नकारात्मक ऊर्जा संतुलन से बचने के लिए पर्याप्त कैलोरी प्रदान करना।
प्रोटीनः
- 1.5-2.0 g/kg शरीर का वजन/दिन।
- उच्च जैविक मूल्य वाले प्रोटीन शामिल करना (दूध, अंडा, मांस, चिकन और दालें)।
- यदि आप केवल तरल आहार का सेवन कर रहे हैं, तो दूध और पीसे हुए अंडों का सेवन करना चाहिए; यदि इनसे दस्त की समस्या होती है, तो दूध का सेवन सीमित मात्रा में करना।
कार्बोहाइड्रेटः - कुल ऊर्जा का 60% प्रदान करना।
- पचाने में आसान कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए (सूजी, चावल, आटा, स्टार्च की जड़ें (starchy roots) और केला)।
- उच्च फाइबर वाले पौधों के पॉलीसेकेराइड्स से सुरक्षित रहने का प्रयास करें; उपमा, खिचड़ी और फलों के कस्टर्ड जैसे व्यंजन का सेवन करना लाभकारी साबित हो सकता है।
तरल पदार्थः
- शरीर से निकले तरल पदार्थों की भरपाई करने और पर्याप्त पेशाब उत्पादन को सुनिश्चित करने के लिए उदार तरल पदार्थों (liberal fluids) का सेवन करना।
- तरल पदार्थों का सेवन करना (सूप, जूस, नारियल पानी,मिल्क शेक)।
विटामिन:
- विटामिन ए, सी और बी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करना।
- अच्छी तरह से पके हुए फल और सब्जियां, लाल ताड़ का तेल, स्पिरुलिना, आंवला, नींबू का प्रयोग करना।
खनिजः
- कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड का सेवन अधिक मात्रा में करना।
- दूध, हरी पत्तेदार सब्जियां, चिरवा, गुड़ और फल का सेवन करना।
- अधिक दस्त होने पर ORS और उच्च खनिज पेय पदार्थों का सेवन करना।
पुराने बुखार का आहार प्रबंधन
पोषक तत्वों की आवश्यकताः
ऊर्जाः
- यदि तापमान ~ 39 डिग्री सेल्सियस है तो 5-10% तक सेवन बढ़ाना।
- बिना किसी असुविधा के वजन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त 500 kcal/day का लक्ष्य रखना।
प्रोटीनः
- 1.2-1.5 g/kg शरीर का वजन/दिन।
- उच्च जैविक मूल्य वाले प्रोटीन शामिल करना (दूध, दही, मांस, चिकन और मछ्ली)।
- कम आय वाले रोगियों के लिए, जैव उपलब्धता में सुधार के लिए सस्ते प्रोटीन स्रोतों और तरीकों का सुझाव देना।
वसाः
- वसा से कुल ऊर्जा का 20-25% बनाए रखना।
- मध्यम-श्रृंखला ट्राइग्लिसराइड्स पर जोर देना और तले हुए खाद्य पदार्थों का परहेज करना।
कार्बोहाइड्रेटः
- कुल ऊर्जा का 60% प्रदान करता है।
- नरम पके हुए रूप में मध्यम फाइबर के साथ सरल और जटिल दोनों कार्बोहाइड्रेट का प्रयोग करना।
खनिजः
- कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन के पर्याप्त सेवन को सुनिश्चित करना।
- दूध, अनाज, दालें, फल और आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे लीवर और मौसमी सब्जियों का सेवन करना।
विटामिनः
- विटामिन डी, ए, फोलिक एसिड, बी6 और सी का सेवन बढ़ाना।
- दूध, पशु आहार और ताजी सब्जियों और फलों का सेवन करना।
तरल पदार्थः
- प्रतिदिन 1.5 लीटर से अधिक पानी पीना।
- दस्त होने पर तरल पदार्थों का सेवन अत्यधिक मात्रा में करना।
बुखार के दौरान खान-पान का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। अत: इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए इस आहार योजना का पालन करना लाभकारी साबित हो सकता है।
बुखार में किन खाद्य पदार्थों का परहेज करना चाहिए?

एक ओर, कुछ खाद्य पदार्थ बुखार से उबरने में सहायक साबित हो सकते हैं लेकिन दूसरी ओर, अन्य खाद्य पदार्थ इस स्थिति को बदतर बना सकते हैं। अत: यदि आप बुखार से पीड़ित हैं तो आपको निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का परहेज करना चाहिए:
- भारी और वसायुक्त खाद्य पदार्थः जिन खाद्य पदार्थों में वसा की मात्रा अधिक होती है और जिन्हें पचाना मुश्किल होता है, जैसे कि तले हुए खाद्य पदार्थ और वसायुक्त मांस, आपके पेट पर अत्यधिक दबाव डाल सकते हैं। इनकी वजह से मतली या पेट दर्द जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
- शर्करा युक्त खाद्य पदार्थ और पेयः अतिरिक्त शर्करा प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकती है, जिसकी वजह से सूजन की समस्या हो सकती है। अत: बुखार होने पर मीठे स्नैक्स, सोडा और मिठाइयों का परहेज करना चाहिए क्योंकि इनसे कम पोषण तत्व प्राप्त होते हैं। इस प्रकार प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कमजोर हो सकती है।
- मसालेदार खाद्य पदार्थः हालांकि, मसालेदार खाद्य पदार्थ बंद नाक को दूर करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन ये आपके गले और पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकते हैं। ऐसा मुख्य रूप से तब हो सकता है जब आप पहले से ही बीमार या कमजोर महसूस कर रहे होते हैं।
- डेयरी उत्पादः कुछ लोगों के अनुसार डेयरी उत्पाद बलगम उत्पादन को बढ़ा सकते हैं, जिससे नाक बंद होने की समस्या हो सकती है। यदि आपक भी बलगम से जूझ रहे हैं, तो दूध, पनीर और दही का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
- कैफीन और शराब युक्त पेय पदार्थः कैफीन और शराब की वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। अत: अत्यधिक मात्रा में पानी, हर्बल चाय और साफ शोरबा का सेवन करना चाहिए।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि बुखार प्रबंधन करते समय, उचित पोषण और अत्यधिक मात्रा में पानी पीना महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त हल्का, पचने में आसान खाद्य पदार्थों और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए ताकि इससे उभरने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा, यदि आपको बुखार से राहत नहीं मिल रही है तो उस स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

