आज के समय में, जब प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खान-पान का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक स्वास्थ्य सुधारने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं—और ये जुड़े हैं एक ऐसी चीज़ से जिसे लोग रोज़ प्रयोग करते हैं: नमक। सुझाव सीधा है लेकिन असरदार—साधारण खाने वाले नमक की जगह कम-सोडियम वाले नमक के विकल्प (Low-Sodium Salt Substitutes – LSSS) का प्रयोग करें, विशेषकर वे जिनमें पोटैशियम मिला होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि ऐसा करने से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन इसका समग्र स्वास्थ्य पर वास्तव में क्या असर पड़ेगा? और क्या यह ऐसा बदलाव है जिसे सभी लोगों को अपनाना चाहिए? आइए, इन दिशा-निर्देशों के पीछे के विज्ञान को समझते हैं और देखते हैं कि यह स्वास्थ्य के लिए क्या मायने रखता है।
समग्र स्वास्थ्य के लिए अधिक सोडियम लेना क्यों नुकसानदायक है?
नमक, अर्थात् सोडियम क्लोराइड, मानव शरीर के लिए आवश्यक होता है। यह शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने, नसों के सही काम करने और मांसपेशियों के संकुचन में मदद करता है। जब इसका सेवन आवश्यकता से अधिक हो जाता है, तब यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बन जाता है। आजकल अधिकांश लोग जितना सोडियम लेना चाहिए उससे कहीं ज्यादा लेते हैं, जिसका मुख्य कारण प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें अक्सर बहुत अधिक नमक होता है। स्वास्थ्य स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक वयस्क को दिन में कुल 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं लेना चाहिए, लेकिन शोध से पता चलता है कि दुनिया भर में औसत सेवन इससे काफी अधिक है।
अत्यधिक सोडियम का सीधा संबंध उच्च रक्तचाप से है, जो हृदय रोगों जैसे दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी फेल्योर का मुख्य कारण है। 2022 में राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD) के तहत 9.91 करोड़ लोगों की जांच की गई। इनमें लगभग 75 लाख लोगों में हाइपरटेंशन, 61 लाख में मधुमेह, 29 लाख में दोनों (हाइपरटेंशन और मधुमेह), 2 लाख में हृदय रोग (CVDs) और 1 लाख में स्ट्रोक पाया गया।
उच्च रक्तचाप ह्रदय और रक्त वाहिकाओं पर लगातार दबाव डालता है, जिससे समय के साथ उनके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। WHO का अनुमान है कि हर साल दुनिया भर में लगभग 1.9 मिलियन मौतें अधिक सोडियम सेवन से संबंधित होती हैं। इसलिए WHO ने 2030 तक सोडियम सेवन को 30% तक कम करने का लक्ष्य रखा है।
लेकिन इस लक्ष्य को हासिल कैसे किया जा सकता है? इसका एक महत्वपूर्ण तरीका खाने के स्वाद को बढ़ाने वाली चीज़—नमक—के विकल्पों में हो सकता है।
निम्न-सोडियम नमक विकल्प (LSSS) क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं?
निम्न-सोडियम नमक विकल्प (LSSS) ऐसे उत्पाद होते हैं जिन्हें साधारण खाने वाले नमक की जगह प्रयोग करने के लिए बनाया जाता है। इनमें अक्सर सोडियम क्लोराइड की जगह या उसके साथ पोटैशियम क्लोराइड मिलाया जाता है। इनका मुख्य लाभ यह है कि ये शरीर में सोडियम की मात्रा को कम करते हैं और साथ ही पोटैशियम की मात्रा को बढ़ा सकते हैं। पोटैशियम एक आवश्यक खनिज है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने, शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने और कोशिकाओं के सही काम में मदद करता है।
ये नमक सामान्य नमक की तरह ही काम करते हैं—अर्थात् खाना पकाने और स्वाद बढ़ाने में इनका प्रयोग उसी तरह किया जा सकता है। दिखने, स्वाद और प्रयोग में ये लगभग सामान्य नमक जैसे ही होते हैं। अतंर सिर्फ इतना है कि इनमें सोडियम कम होता है, लेकिन फिर भी नमकीन स्वाद मिलता रहता है। इसका अर्थ है कि लोग बिना स्वाद खोए अपने सोडियम सेवन को कम कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, पोटैशियम से भरपूर नमक (potassium-enriched salt) सोडियम के सेवन को लगभग 50% तक कम कर सकता है। इसे उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों को रोकने में एक आसान लेकिन प्रभावी तरीका माना जाता है। यह बदलाव उन देशों में विशेष तौर पर बहुत उपयोगी हो सकता है, जहाँ लोग बहुत अधिक नमक खाते हैं, जैसे चीन और भारत।
पोटैशियम हृदय स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बनाता है?
पोटैशियम को अक्सर सोडियम का “विरोधी” (antagonist) कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर में ज्यादा सोडियम के दुष्प्रभावों को संतुलित करने में मदद करता है। यह खनिज रक्त वाहिकाओं (blood vessels) की दीवारों को आराम देता है, जिससे रक्तचाप कम हो सकता है और ह्रदय पर दबाव घटता है।
कई अध्ययनों से पता चला है कि पोटैशियम से भरपूर आहार लेने से स्ट्रोक और हृदय रोग का जोखिम कम हो सकता है। जिन देशों में लोग पर्याप्त पोटैशियम नहीं लेते, वहाँ पोटैशियम से भरपूर नमक विकल्पों का प्रयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है। इससे उच्च रक्तचाप कम होता है और ह्रदय रोगों का जोखिम घटता है।
पोटैशियम जितना लाभदायक है, उतना ही संतुलन आवश्यक है। अत्यधिक पोटैशियम लेने से “हाइपरकैलीमिया” (Hyperkalaemia) नाम की स्थिति हो सकती है, जिसमें खून में पोटैशियम खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि निम्न-सोडियम, पोटैशियम से भरपूर नमक का प्रयोग किडनी रोगियों को नहीं करना चाहिए क्योंकि उनका शरीर अतिरिक्त पोटैशियम को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता है।
किन लोगों को पोटैशियम से भरपूर नमक विकल्प नहीं प्रयोग करना चाहिए?
हालांकि, ये नमक अधिकांश लोगों के लिए लाभदायक हो सकते हैं, लेकिन हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं हैं।
1. गर्भवती महिलाएँ: गर्भावस्था में शरीर में हार्मोन और रक्तचाप में कई बदलाव होते हैं। अत्यधिक पोटैशियम इन बदलावों के साथ मिलकर समस्या पैदा कर सकता है, इसलिए सावधानी बरतना आवश्यक है।
2. बच्चे: बच्चों का शरीर अभी विकसित हो रहा होता है और उनकी पोषण संबंधी आवश्यकताएं अलग होती हैं। अचानक अत्यधिक पोटैशियम लेना उनके शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है।
3. किडनी रोगी: किडनी का काम शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम को बाहर निकालना होता है। अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है, तो पोटैशियम जमा होकर गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, जैसे दिल की धड़कन में गड़बड़ी, मांसपेशियों में कमजोरी या गंभीर स्थिति में कार्डियक अरेस्ट।
इन लोगों को किसी भी तरह का नमक बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का सुझाव है कि लोग निम्न-सोडियम नमक (LSSS) का प्रयोग करें। यह बदलाव सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा सुधार ला सकता है। इससे शरीर में सोडियम कम होगा और पोटैशियम बढ़ेगा। इसका लाभ यह है कि ह्रदय रोग, स्ट्रोक और किडनी रोग का जोखिम कम हो सकता है। लेकिन यह हर किसी के लिए सही नहीं है। कुछ लोगों को, जैसे किडनी मरीजों को, यह नमक प्रयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही, इसे सस्ता और हर जगह आसानी से उपलब्ध बनाना भी आवश्यक है। अगर सही तरीके से और सही सलाह के साथ इसका प्रयोग किया जाए, तो रोज़ की एक छोटी-सी आदत में बदलाव से सेहत में सुधार हो सकता है।
इस बदलाव से न सिर्फ लोगों की जान बच सकती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियाँ भी ज्यादा स्वस्थ और लंबी उम्र जी सकती हैं। इसलिए अगली बार जब कोई व्यक्ति नमक ले, तो उसे यह सोचना चाहिए कि एक छोटा-सा बदलाव उसके स्वास्थ्य पर क्या असर डाल सकता है।
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