हल्दी की उत्पत्ति कर्क्यूमा लोंगा पौधे की जड़ से होती है, जिसका सेवन गठिया समेत विभिन्न रोगों के प्रबंधन में किया जा सकता है। हल्दी में मौजूद यौगिक करक्यूमिन के एंटी-इन्फ्लेमेशन गुणों की पुष्टि के लिए लंबे समय से अध्ययन किए जा रहे हैं। भारत में इसका प्रयोग भोजन के रंग और स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस लेख में हमने गठिया प्रबंधन में हल्दी की भूमिका पर चर्चा की है।
क्या हल्दी गठिया के लिए लाभकारी है?
हां, गठिया के प्रबंधन में हल्दी का प्रयोग अन्य जड़ी बूटियों की तरह किया जा सकता है। इसका प्रयोग न केवल प्राचीन युग में किया जाता था बल्कि आधुनिक विज्ञान द्वारा भी गठिया के प्रबंधन में एक सहायक कारक के रूप में किया जाता है। इसमें मौजूद कई गुण गठिया से संबंधित इन्फ्लेमेशन और दर्द को कम करने में सहायता कर सकते हैं।
2021 के अध्ययनों के अनुसार, घुटने का ऑस्टियोआर्थराइटिस के रोगियों ने अपने उपचार में हल्दी को शामिल करने से स्वास्थ्य संबंधी लाभ महसूस किए हैं। नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) की तरह हल्दी दर्द को कम और हड्डियों के कार्य में सुधार कर सकती है। हल्दी नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) के लिए एक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है जो गठिए के दर्द को कम कर सकती है और NSAIDs की खुराक को कम कर सकती है।
2018 के एक अध्ययन में हल्दी में एक सक्रिय यौगिक करक्यूमिन की तुलना गठिया के दर्द से राहत के लिए एलोपैथिक दवा से की गई है। इन अध्ययनों में रोगियों से कुछ प्रश्न उदाहरण के लिए वे कैसा महसूस कर हैं, किए हैं। इस प्रकार इनकी तुलना की गई है। इससे पता चला कि जिन लोगों ने हल्दी का सेवन किया है उन्होंने अपने जोड़ों में दर्द में आराम महसूस किया है।
2014 में Nakagawa et al द्वारा किए गए एक अध्ययन में 40 वर्ष से अधिक उम्र के 50 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिन्होंने 8 सप्ताह तक प्रतिदिन 180 मिलीग्राम करक्यूमिन का सेवन किया। करक्यूमिन का सेवन करने वाले लोगों में प्लेसीबो समूह की तुलना में गठिया के दर्द में अधिक कमी देखी गई और करक्यूमिन का सेवन न करने वाले लोगों को दर्द निवारक दवा की आवश्यकता पड़ी।
Panahi et al द्वारा 2014 के एक अन्य अध्ययन में 80 वर्ष से कम उम्र के 53 प्रतिभागियों का परीक्षण किया गया, उन्होंने 6 सप्ताह तक रोजाना तीन बार काली मिर्च के साथ 500 मिलीग्राम करक्यूमिन दिया गया। इस अध्ययन से पता चला कि करक्यूमिन ने उन लोगों की तुलना में ऑस्टियोआर्थराइटिस की संभावना में कमी और दर्द राहत में काफी सुधार किया, जिन्होंने इसका सेवन नहीं किया था।
इन सभी शोध पत्रों (research papers) से पता चलता है कि हल्दी गठिया से संबंधित लक्षणों को कम करने में सहायता कर सकती है। यह ध्यान रखना चाहिए कि हल्दी केवल लक्षणों को कम कर सकती है लेकिन यह गठिया को पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकती है।
क्या हल्दी गठिया के रोगी को तुरंत दर्द से राहत दे सकती है?
नहीं, आमतौर पर हल्दी गठिया के लिए तत्काल दर्द से राहत नहीं दी सकती है। NSAIDs (नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ़्लेमेटरी ड्रग्स) की तुलना में हल्दी के प्रभाव अधिक क्रमिक होते हैं जो तत्काल गठिया के दर्द से राहत दे सकते हैं। हल्दी में मौजूद जैव सक्रिय करक्यूमिन गठिया के दर्द को कम करने में तभी सहायता कर सकता है जब इसका सेवन प्रतिदिन सीमित मात्रा में किया जाता है। इसका सेवन सप्लीमेंट के रूप में करने पर इसके लाभ दिन, सप्ताह या महीनों में नज़र आ सकते हैं।
हल्दी के दुष्प्रभाव क्या हैं?
हालांकि, अधिकांश लोगों के लिए हल्दी का सेवन सीमित मात्रा में करने को सुरक्षित माना जाता है लेकिन 2020 के एक शोध पत्र में हल्दी के दुष्प्रभावों को सूचीबद्ध किया गया है जिनकी जानकारी प्रत्येक गठिया रोगी को होनी चाहिए:
DNA क्षति का कारण बन सकता हैः शोध में करक्यूमिन के कुछ संभावित प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख किया है, जिसके परिणामस्वरूप DNA क्षति हो सकती है।
क्रोनिक विषाक्तता (Chronic Toxicity): एक ओर, जानवरों में किए गए लंबे समय के अध्ययनों के मिश्रित निष्कर्ष देखने को मिले हैं तो वहीं दूसरी ओर, कुछ अध्ययनों में किसी गंभीर समस्या का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बावजूद हल्दी की अधिक खुराक से यकृत को नुकसान, अल्सर और गंभीर मामलों में, चूहों में कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अन्य अध्ययनों में हल्दी की उच्च खुराक के साथ संभावित यकृत विषाक्तता (liver toxicity) का संकेत दिया है।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का कारण बन सकता हैः करक्यूमिन आमतौर पर विशिष्ट आहार स्तरों पर मनुष्यों में अच्छी तरह से पच नहीं पाता है। कई अध्ययनों में उल्लेख किया गया है कि इसकी अधिक खुराक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं, दस्त और पाचन अल्सर इत्यादि का कारण बन सकती है।
दवाइयों के असर को प्रभावित करना: कुछ लोगों में, करक्यूमिन रक्त को पतला करने वाली दवाओं और मधुमेह की दवाओं के असर को प्रभावित कर सकता है और उनके लाभों को कम कर सकता है।
अन्य दुष्प्रभाव: करक्यूमिन उन लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है जिन्हें हल्दी या संबंधित पौधों से एलर्जी है। कुछ महिलाओं में हल्दी गर्भाशय के संकुचन की संभावना को भी बढ़ा सकती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। पित्ताशय की पथरी या पित्त संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को हल्दी का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
हालांकि, हल्दी और करक्यूमिन आमतौर पर सुरक्षित होते हैं लेकिन इनका सेवन सीमित मात्रा में करना आवश्यक है। इसके अलावा इनका सेवन करने से पहले इसके संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जानना और अपने चिकित्सक से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।
गठिया रोगियों को हल्दी का सेवन कैसे करना चाहिए?
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए आप हल्दी का सेवन विभिन्न प्रकार से कर सकते हैं:
- हल्दी की चाय (Turmeric Tea): दो चम्मच हल्दी पाउडर को एक चुटकी काली मिर्च के साथ गर्म पानी में मिलाकर हल्दी की चाय बनाएं। इसका स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें शहद भी मिला सकते हैं और इसका सेवन दिन में एक बार कर सकते हैं।
- हल्दी का दूध (Golden Milk): आपके यूरिक एसिड के स्तर/गठिया को कम करने के लिए, सोने से पहले हल्दी का दूध पीना लाभकारी हो सकता है। एक चम्मच हल्दी पाउडर को गर्म दूध (डेयरी या प्लांट बेस्ड) और एक चुटकी काली मिर्च के साथ मिलाएं। इसे सोने से पहले पीना चाहिए।
- हल्दी सप्लीमेंटः विशिष्ठ मात्रा के लिए, हल्दी या करक्यूमिन सप्लीमेंट का सेवन करना चाहिए। ध्यान दें कि इसका सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक के साथ उचित खुराक पर चर्चा करनी चाहिए।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

