कीटो डाइट को केटोजेनिक डाइट (ketogenic diet) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें कॉर्बोहाइट की कम मात्रा होने के कारण अधिकांश लोग इसका सेवन या पालन करते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट के सेवन को कम और 70-80% तक वसा की खपत को बढ़ाना शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर में केटोसिस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति में शरीर कार्बोहाइड्रेट के बजाय ईंधन के लिए वसा जलाने का कार्य शुरू करने लगता है। अधिकांश लोग हृदय स्वास्थ्य और वजन घटाने तथा संभावित स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के कारण कीटो डाइट की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर पर इसके सकारात्मक प्रभाव के कारण यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
कीटो डाइट कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कैसे प्रभावित करता है?
कीटो डाइट का कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता है, जो हृदय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण कारक हैं।
कोलेस्ट्रॉल का स्तरः
LDL कोलेस्ट्रॉलः LDL (निम्न- घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल, जिसे ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल के रूप में भी जाना जाता है, कीटो डाइट के दौरान बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस आहार में अधिक मात्रा में वसा होती है, जिनमें से कुछ LDL के स्तर को बढ़ा सकती है।
HDL कोलेस्ट्रॉलः HDL (उच्च- घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल, जिसे ‘अच्छे’ कोलेस्ट्रॉल के रूप में भी जाना जाता है, जो आमतौर पर केटोजेनिक आहार में अधिक होता है। HDL रक्तप्रवाह से LDL कोलेस्ट्रॉल को हटाने में सहायता, धमनियों में प्लाक के निर्माण के जोखिम को कम करता है। अत: उच्च HDL स्तर आमतौर पर लाभदायक होते हैं।
ट्राइग्लिसराइड्सः
ट्राइग्लिसराइड का स्तर आमतौर पर कीटोजेनिक आहार में कम हो जाता है। ट्राइग्लिसराइड्स का उच्च स्तर हृदय रोग के लिए एक जोखिम कारक है। चूंकि, कीटो डाइट मुख्य रूप से शर्करा और कार्ब्स से रहित है इसलिए केटोजेनिक आहार ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में सहायता कर सकता है।
क्या कीटो डाइट एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम को बढ़ा सकता है?
शायद। व्यक्तिगत प्रतिक्रियाओं के आधार पर, एक केटोजेनिक आहार (जिसमें अधिक मात्रा में वसा और कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं) विभिन्न तरीकों से एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, एक केटोजेनिक आहार HDL (अच्छे कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाकर और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करके लिपिड प्रोफाइल में सुधार कर सकता है। यह संभावित रूप से एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम को कम कर सकता है। अगर इसे प्रबंधित न किया जाए, तो संतृप्त वसा से भरपूर यह आहार LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को भी बढ़ा सकता है। चूंकि इसके दीर्घकालिक (लंबे समय) प्रभाव चर्चा का एक विषय है, इसलिए लिपिड प्रोफाइल पर निगरानी रखना महत्वपूर्ण है।
क्या कीटो डाइट दिल के दौरे के खतरे को बढ़ा सकता है?
हां। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के वार्षिक वैज्ञानिक सत्र और वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ कार्डियोलॉजी में हाल ही में प्रस्तुत एक अध्ययन में पाया गया है कि कम कार्बोहाइड्रेट और उच्च वसा से भरपूर कीटो डाइट का सेवन करने से सीने में दर्द, ब्लॉक धमनियों, दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके परिणामों से स्पष्ट है कि ‘कम कार्ब्स, उच्च वसा’ आहार अर्थात् जिसमें कार्बोहाइड्रेट से 25% से अधिक कैलोरी और वसा से 45% से अधिक शामिल नहीं है, का सेवन करने से हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
हृदय पर कीटो डाइट के प्रभाव के बारे में शोध के निष्कर्ष क्या हैं?
करंट प्रोब्लेम्स इन कार्डियोलॉजी के अंक 2024 में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार केटोजेनिक आहार में मुख्य रूप से वसा और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है जबकि इसमें कार्बोहाइड्रेट की कम मात्रा होने से हृदय रोगियों के लिए जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। हालांकि, केटोजेनिक आहार से कुछ समय के लिए वजन घटाने में सहायता मिल सकती है लेकिन इसके लंबे समय के लाभों का समर्थन या पुष्टि करने वाले वैज्ञानिक साक्ष्य अपर्याप्त हैं। हालांकि यह ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम कर सकता है लेकिन यह आमतौर पर LDL कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है। यह हृदय रोग के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। ध्यान रखें कि रक्तचाप और शर्करा में कोई भी अल्पकालिक (थोड़े समय) सुधार समय के साथ कम हो सकता है। ऐसा देखा गया है कि लोग अक्सर बहुत सारे फलों और सब्जियों का परहेज करते हैं और कीटो की प्रतिबंधात्मक प्रकृति के कारण पत्तेदार सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं। कुछ हृदय रोगियों द्वारा ली जाने वाली एंटी-क्लॉटिंग दवा वारफेरिन इन सब्जियों में मौजूद विटामिन k से प्रभावित हो सकती है।
क्या कीटो डाइट सुरक्षित है?
कीटो डाइट का सेवन मुख्य रूप से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह उच्च वसा खाने के दौरान लोगों की जल्दी वजन कम करने में सहायता करता है, क्योंकि वसा भोजन के स्वाद को बढ़ाता है। अधिकांश लोग कीटो डाइट को अपनी जीवन शैली में शामिल करना पसंद करते हैं, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हो सकते हैं। केटोजेनिक आहार जैसे कम कार्ब आहार को हृदय रोग और कैंसर से मृत्यु दर को क्रमशः 51% और 35%, साथ ही सभी कारणों से 32% तक बढ़ाने के रूप में देखा जाता है। इन निष्कर्षों के अनुसार, लंबे समय तक कीटो का पालन करने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं। अत: कोई भी नया आहार शुरू करने या जारी रखने से पहले, एक आहार विशेषज्ञ (dietician) से परामर्श करना आवश्यक है।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

