आंतरायिक उपवास (IF) एक डाइट तरीका है जो वजन घटाने के साथ-साथ अपने संभावित स्वास्थ्य लाभों के कारण भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। इसमें किसी खास खाने को छोड़ने या कैलोरी गिनने की बजाय, खाने और उपवास के समय को बदल-बदल कर अपनाया जाता है। इस लेख में आंतरायिक उपवास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
आंतरायिक उपवास (intermittent fasting) क्या है?
आंतरायिक उपवास पारंपरिक अर्थों में कोई डाइट नहीं है, बल्कि यह खाने का एक तरीका है। कई डाइट्स जहाँ इस बात पर ज़ोर देती हैं कि क्या खाना चाहिए या क्या नहीं, वहीं आंतरायिक उपवास में इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि कब खाना चाहिए। इसमें खाने के समय के दौरान कौन-सा खाना खाना है, यह सख्ती से तय नहीं होता, लेकिन आमतौर पर पौष्टिक और साबुत खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी जाती है।
आंतरायिक उपवास के प्रकार क्या हैं?
इसके विभिन्न तरीके हैं और हर तरीका खाने और उपवास के समय को अलग तरीके से अपनाता है। यहाँ कुछ सबसे सामान्य प्रकार दिए गए हैं:
- 16/8 विधि: इसे लींगेंस (Leangains) प्रोटोकॉल भी कहा जाता है। इसमें 16 घंटे उपवास और 8 घंटे खाने की खिड़की होती है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति सुबह का नाश्ता छोड़ सकता है और सभी भोजन दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे के बीच कर सकता है।
- 5:2 डाइट: इस तरीके में व्यक्ति सप्ताह के पाँच दिन सामान्य रूप से खाते हैं और शेष दो गैर-लगातार दिनों में कैलोरी की मात्रा सीमित करते हैं।
- ईट-स्टॉप-ईट (Eat-Stop-Eat): इसमें सप्ताह में एक या दो बार पूरे 24 घंटे उपवास किया जाता है। इस दौरान केवल पानी, चाय और ब्लैक कॉफ़ी जैसी कैलोरी-रहित पेय चीज़ें ली जा सकती हैं।
- ऑल्टरनेट-डे फास्टिंग (Alternate-Day Fasting): जैसा कि नाम से स्प्ष्ट है, इसमें उपवास वाले दिन और खाने वाले दिन बारी-बारी से आते हैं। उपवास वाले दिन कैलोरी का सेवन बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता है।
- वारियर डाइट (Warrior Diet): इसमें हर दिन 20 घंटे उपवास और रात में एक बड़ा भोजन शामिल होता है। उपवास के दौरान थोड़े मात्रा में कच्चे फल, सब्ज़ियां और प्रोटीन शेक लिए जा सकते हैं।
- OMAD (दिन में एक बार भोजन करना): जैसा नाम से स्पष्ट है, OMAD में केवल एक ही भोजन किया जाता है, आमतौर पर एक घंटे की खिड़की में, और बाकी 23 घंटे उपवास रहता है।
आंतरायिक उपवास के चरण क्या हैं?
आंतरायिक उपवास के दौरान शरीर छह अलग-अलग चरणों से गुजरता है। ये चरण इस प्रकार हैं:
- 12 घंटे: शरीर कीटोसिस में प्रवेश करता है। इस समय शरीर वसा जलाना शुरू करता है और मस्तिष्क व अन्य अंगों के लिए ऊर्जा के विकल्प के रूप में कीटोन बॉडीज़ बनाता है।
- 18 घंटे: शरीर पूरी तरह फैट-बर्निंग मोड में चला जाता है। कीटोन उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि होती है और यह सीखने और याददाश्त में सुधार की संभावना बढ़ाता है।
- 24 घंटे: कोशिकाएं ऑटोफैगी शुरू करती हैं, अर्थात् सेल्स की मरम्मत और क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया।
- 48 घंटे: ग्रोथ हॉर्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे मांसपेशियों की सुरक्षा, वसा घटाना और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- 54 घंटे: इंसुलिन का स्तर सबसे कम होता है, जिससे इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है और इन्फ्लेमेशन कम होता है।
- 72 घंटे: पुराने इम्यून सेल्स टूटते हैं और नए इम्यून सेल्स बनते हैं।
ये चरण इस उपवास के दौरान शरीर में होने वाले क्रमिक भौतिक और जैविक बदलावों को दर्शाते हैं।
क्या आंतरायिक उपवास हृदय रोग (Cardiovascular Disease) का जोखिम बढ़ाता है?
20,000 से अधिक वयस्कों पर किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि जिन लोगों ने टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग (दिन में 8 घंटे से कम खाने की सीमा) अपनाई, उन्हें हृदय रोग से मृत्यु का अधिक जोखिम था। इस शोध को अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) के सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जिसमें NHANES और CDC के नेशनल डेथ इंडेक्स के डेटा का विश्लेषण किया गया। यह अध्ययन 8-घंटे के टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग प्लान के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में चिंता बढ़ाता है और आगे के शोध की आवश्यकता पर जोर देता है।
आंतरायिक उपवास को किसने शुरू किया?
इस उपवास को व्यापक ध्यान तब मिला जब 2012 की डॉक्यूमेंट्री “Eat Fast, Live Longer” और किताबें जैसे “The Fast Diet” और “The 5:2 Diet” आईं। इसके बाद, डॉ. जेसन फंग (Dr. Jason Fung) की 2016 की बेस्टसेलर पुस्तक “The Obesity Code” ने इसे और लोकप्रिय बनाया। इसमें उन्होंने शोध, क्लिनिकल अनुभव और आहार संबंधी सलाह को मिलाकर इस उपवास को समझाया। फंग का जोर है कि अधिक फल, सब्ज़ियां, फाइबर और हेल्दी फैट्स खाएं, जबकि शुगर, परिष्कृत अनाज, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक स्नैकिंग से बचें। वे मोटापे में योगदान देने वाले सामाजिक और जीवनशैली कारकों पर भी चर्चा करते हैं।
आंतरायिक उपवास के लाभ क्या हैं?
यह केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं है; इसके कई संभावित स्वास्थ्य लाभ हैं। मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
- वजन और वसा में कमी (Weight Loss and Fat Loss): कैलोरी सेवन कम करने और मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने की संभावना के कारण IF वजन और वसा घटाने का प्रभावी तरीका हो सकता है।
- बेहतर मेटाबॉलिक स्वास्थ्य (Improved Metabolic Health): आंतरायिक उपवास इंसुलिन संवेदनशीलता, ब्लड शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल स्तर जैसे मेटाबॉलिक स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार कर सकता है।
- मस्तिष्क क्षमता में सुधार (Enhanced Brain Function): कुछ अध्ययन सुझाव देते हैं कि IF मस्तिष्क स्वास्थ्य का समर्थन कर सकता है। यह BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नामक प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ावा देता है, जो संज्ञानात्मक कार्य और मूड को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण है।
- ऑटोफैगी बढ़ाना (Increased Autophagy): ऑटोफैगी एक सेलुलर प्रक्रिया है जिसमें क्षतिग्रस्त या dysfunctional घटकों को हटाया जाता है। IF ऑटोफैगी को उत्तेजित करता है, जो विभिन्न रोगों से बचाव और जीवन लंबाई बढ़ाने में मदद कर सकता है।
- इन्फ्लेमेशन कम करना (Reduced Inflammation): लंबे समय तक इन्फ्लेमेशन कई स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित होता है, जैसे हृदय रोग, लिवर रोग, कैंसर और ऑटोइम्यून स्थितियाँ। यह उपवास शरीर में इन्फ्लेमेशन को कम करने में सहायता कर सकता है।
- जीवनकाल बढ़ाना (Longevity): कुछ पशु अध्ययन सुझाव देते हैं कि यह जीवनकाल बढ़ा सकता है और उम्र से संबंधित बीमारियों के शुरू होने में देरी कर सकता है।
आंतरायिक उपवास के दुष्प्रभाव क्या हैं?
हालांकि, इस उपवास के विभिन्न स्वास्थ्य लाभ होते हैं, लेकिन कुछ संभावित दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इनकी जानकारी होना आवश्यक है:
- भूख और चिड़चिड़ापन: इस उपवास के दौरान, विशेषकर शुरुआत में, कुछ लोगों को भूख और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
- ऊर्जा का कम स्तर: इस उपवास से ऊर्जा का स्तर कम हो सकता है, विशेष रूप से पहले कुछ दिनों में।
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई: कुछ लोगों को उपवास के दौरान ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है, विशेष रूप से जब वे यह उपवास शुरू कर रहे हों।
- खाने की असामान्य आदतें: कुछ मामलों में, IF अधिक खाने या कैलोरी की अत्यधिक गिनती जैसी असामान्य खाने की आदतें बढ़ा सकता है।
- पोषक तत्वों की कमी का जोखिम: खाने के समय के दौरान भोजन के चयन के आधार पर, आंतरायिक उपवास पोषक तत्वों की कमी का जोखिम बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
आंतरायिक उपवास से सेहत में सुधार, वजन नियंत्रण और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। अपने जीवनशैली के अनुसार सही प्रकार चुनना आवश्यक है और इसे ध्यानपूर्वक अपनाना चाहिए।
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