वर्तमान समय में जंक, चिकनाई युक्त और मसालेदार खाद्य पदार्थों के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को जानने के बावजूद इन्हें खाना पसंद करते हैं। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है, जिनमें बवासीर भी शामिल है। इससे लगभग 75% भारतीय लोग पीड़ित हैं। बवासीर को Hemorrhoids के नाम से भी जाना जाता है, जो एक सामान्य और प्रबंधनीय स्थिति है। इसकी रोकथाम और प्रबंधन के कारगर तरीकों में स्वस्थ भोजन (healthy food) करना शामिल है। इसके माध्यम से बवासीर के लक्षणों को कम किया जा सकता है और उपचार भी बेहतर तरीके से किया जा सकता है। ऐसे में यह प्रश्न करना स्वभाविक है कि क्या बवासीर होने पर फाइबर युक्त भोजन करना लाभकारी हो सकता है अथवा नहीं। इस लेख में हमने इस विषय या प्रश्न पर विस्तार से चर्चा की है।
बवासीर (Hemorrhoids) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है जब गुदे (anus) की नसों में सूजन हो जाती है। बवासीर के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:
आंतरिक बवासीर
स्थान: मलाशय के निचले हिस्से के अंदर।
लक्षण: आमतौर पर ज्यादा दर्द नहीं होता है। इसके बावजूद जब आप बाथरूम जाते हैं तो आपको रक्तस्राव या असहज लग सकता है।
बाहरी बवासीर
स्थान: गुदा के आसपास, कूल्हे के बाहरी क्षेत्र में।
लक्षण: यह दर्दनाक हो सकता है क्योंकि यह क्षेत्र संवेदनशील है। इसकी वजह से जब आप बाथरूम जाते हैं तब आपको खुजली, सूजन और असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जलन होने पर रक्तस्राव भी हो सकता है।
हालांकि इन दोनों के उपचार में अक्सर घरेलू नुस्खे या दवा सहायक हो सकते हैं, लेकिन अगर इनकी स्थिति चिंताजनक हैं, तो आपको चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
बवासीर में किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए?
बवासीर को प्रबंधित करने के लिए फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों (सभी सब्जियों और फलों में फाइबर की मात्रा अधिक होती है) और अत्याधिक मात्रा में पानी पीना महत्वपूर्ण है। इस स्थिति में बवासीर रोगी निम्नलिखित प्रकार की डाइट का पालन कर सकते हैं:
फाइबर से भरपूर सब्जियां
- पालक (spinach): यह फाइबर से भरपूर होता है, जिसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में किया जा सकता है।
- लौकी (Bottle Gourd): हल्की और पानी से भरपूर।
- गाजर (Carrots): इसे कढ़ी, सलाद में मिलाया जा सकता है या इसका जूस भी निकाला जा सकता है।
- चुकंदर (Beetroot): फाइबर से भरपूर और पाचन तंत्र के लिए लाभदायक।
- कद्दू (Pumpkin): हल्का और पचाने में आसान।
फाइबर से भरपूर फल
- अमरूदः इसमें अधिक मात्रा में फाइबर और विटामिन सी होते हैं।
- नाशपाती (Pears): पाचन के लिए लाभदायक और फाइबर से भरपूर।
- सेब (Apples): त्वचा को अतिरिक्त फाइबर प्रदान करना।
- पपीता (Papaya): इसमें पाचन एंजाइम होते हैं जो पाचन तंत्र के लिए लाभदायक हो सकते हैं।
- केले (Bananas): विशेष रूप से पके हुए केले पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।
भारतीय फलियां और दालें
- चना (Chickpeas): इसका प्रयोग कढ़ी, सलाद या हम्मस बनाने में किया जाता है।
- दाल (Lentils): इसकी किस्में जैसे मूंग दाल, तूर दाल या अरहर की दाल और उड़द दाल अच्छे विकल्प हैं।
- राजमा (Kidney Beans): प्रोटीन और फाइबर का एक अच्छा स्रोत है।
साबुत अनाज
- ब्राउन चावल: सफेद चावल का एक फाइबर युक्त विकल्प है।
- गेहूं की रोटीः फाइबर से भरपूर और विभिन्न भारतीय क्षेत्रों का प्रमुख खाद्य पदार्थ।
- ओट्स: इसे नाश्ते में शामिल किया जा सकता है या दलिया बनाया जा सकता है।
नट्स और बीज
- अलसी (Flaxseeds): इसे स्मूदी, दही या अनाज में मिलाया जा सकता है।
- चिया के बीज: इसे अतिरिक्त फाइबर के लिए पेय पदार्थ या दही में मिलाया जा सकता है।
- बादामः नाश्ते में या व्यंजनों को सजाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
तरल पदार्थ
- पानीः दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
- छाछ (Buttermilk): आरामदायक और पाचन तंत्र में सहायक हो सकता है।
- हर्बल चायः अदरक या पुदीने की चाय।
- नारियल पानीः पेट पर हाइड्रेटिंग और कोमल।
विशिष्ट भारतीय भोजन और व्यंजन
- सब्जी की खिचड़ी: चावल, दाल और सब्जियों से बनी; पचाने में आसान और फाइबर से भरपूर होती है।
- दाल (Lentil Soup): फाइबर और प्रोटीन के लिए विभिन्न प्रकार की दालों का सेवन करना चाहिए।
- सब्जी कढ़ी: इसे फाइबर से भरपूर सब्जियों के मिश्रण से बनाया जाता है और गेहूं की रोटी के साथ परोसा जाता है।
- फलों का सलादः फाइबर से भरपूर स्नैक के लिए अमरूद, सेब और केले मिलाना चाहिए।
इन खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करने से बवासीर के लक्षणों को प्रबंधित करने और कम करने में मदद मिल सकती है।
क्या केवल डाइट से आंतरिक और बाहरी बवासीर की रोकथाम में सहायता मिल सकती है?
नहीं, हालांकि डाइट आंतरिक और बाहरी बवासीर (haemorrhoids) दोनों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है लेकिन यह आमतौर पर तभी कारगर हो सकती हैं जब इसे जीवनशैली के अन्य परिवर्तनों के साथ किया जा सकता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- नियमित कसरत करना: शारीरिक गतिविधि पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायता कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप मलाशय की नसों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।
- लंबे समय तक बैठने से बचना: लंबे समय तक बैठने से, विशेष रूप से शौचालय पर, मलाशय की नसों पर दबाव बढ़ सकता है।
- बाथरूम संबंधी अच्छी आदतों का पालन करना: शौचालय के दौरान अतिरिक्त प्रयास करने से बचें और कोशिश करें कि आवश्यकतानुसार बाथरूम जाएं।
यदि आपको बवासीर के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो चिकित्सक से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।
बवासीर के दौरान किन खाद्य पदार्थों का परहेज करना चाहिए?
बवासीर (haemorrhoids) का प्रबंधन करते समय उन खाद्य पदार्थों से बचना महत्वपूर्ण है जो इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं या असहजता उत्पन्न कर सकते हैं। यहां कुछ खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों की सूची दी गई है जिनका सेवन बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को नहीं करना चाहिएः
- कम फाइबर वाले खाद्य पदार्थः प्रसंस्कृत और परिष्कृत खाद्य पदार्थ, जैसे सफेद ब्रेड, सफेद चावल और पेस्ट्री, कब्ज का कारण बन सकते हैं और बवासीर के लक्षणों को खराब कर सकते हैं। अत: फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
- वसायुक्त खाद्य पदार्थ (Fatty Foods): वसा से भरपूर खाद्य पदार्थ उदाहरण के लिए तला हुआ खाद्य पदार्थ, कब्ज का कारण बन सकते हैं और बवासीर को बढ़ा सकते हैं। अत: मांस, फास्ट फूड और वसा युक्त डेयरी उत्पादों के सेवन को सीमित करने का प्रयास करना चाहिए।
- लाल मांसः इसे पचाने में कठिनाई हो सकती है, जिससे कब्ज की समस्या हो सकती है। अत: इसके सेवन को कम करने या दुबला मांस का सेवन करने का प्रयास करना चाहिए।
- डेयरी उत्पादः कुछ लोगों को पनीर और दूध जैसे डेयरी उत्पादों की वजह से कब्ज की समस्या हो सकती है। यदि आपको भी यही समस्या होती है, तो इनके सेवन को सीमित करने या लैक्टोज मुक्त विकल्प चुनने का प्रयास करना चाहिए।
- शराबः यह पानी की कमी (dehydration) और कब्ज का कारण बन सकती है। अत: शराब के सेवन को कम करने या परहेज करने से कब्ज के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।
इसके बजाय, फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और फलियों से फाइबर से भरपूर आहार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके अलावा बवासीर की रोकथाम और प्रबंधन के लिए बहुत सारा पानी पीना भी महत्वपूर्ण है।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

