सफेद अंडे का सेवन मुख्य रूप से प्रोटीन प्राप्त करने के लिए किया जाता है। हालांकि, इसमें कैलोरी की मात्रा कम और वसा नहीं होता है लेकिन इसका सेवन कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका सेवन करने से अंडे की एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अत: इसके दुष्प्रभावों की संपूर्ण जानकारी होना आवश्यक है। इस लेख में हमने यही जानकारी देने का प्रयास किया है। अत: इसे पूरा पढ़ें।
कच्चे सफेद अंडे और पके हुए सफेद अंडे में से कौन-सा अधिक नुकसादायक है?
हालांकि, कच्चे सफेद अंडे और पके हुए सफेद अंडे के विभिन्न जोखिम होते हैं, लेकिन कच्चे अंडे का सेवन करना अधिक नुकसानदायक हो सकता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- जीवाणु संक्रमण (Bacterial Contamination): इससे साल्मोनेला और अन्य जीवाणु संक्रमण होने की संभावना रहती है। इसके परिणामस्वरूप, फ़ूड पॉइजनिंग हो सकती है।
- पचाने योग्य न होना: कच्चे अंडे में एविडिन नामक प्रोटीन होता है, जो बायोटिन के अवशोषण में बाधा डाल सकता है। अत: अंडे को पकाने से यह नष्ट हो जाता है, जिससे पका हुआ सफेद अंडा पचाने योग्य होता है।
- प्रोटीन का नष्ट होना: कच्चे अंडे की तुलना में पके हुए अंडे का सेवन करने से न सिर्फ कब्ज होने की समस्या कम हो जाती है बल्कि प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ जाती है।
हालांकि, अंडे को पकाने से बैक्टीरिया नष्ट और पाचन क्षमता में सुधार होता है, लेकिन कच्चे अंडे का सेवन करने से बैक्टीरिया संदूषण (contamination) और पोषक तत्वों के अवशोषण संबंधी समस्या होने का खतरा बढ़ सकता है। अत: पके हुए सफेद अंडा का सेवन करना चाहिए।
सफेद अंडे के दुष्प्रभाव क्या हैं?

विभिन्न शोध सफेद अंडे के दुष्प्रभावों पर किए गए हैं। अत: किसी भी व्यक्ति को सफेद अंडे का सेवन करने से पहले निम्नलिखित दुष्प्रभावों की जानकारी होनी चाहिए:
- एलर्जी प्रतिक्रियाएँः सफेद अंडे की एलर्जी खाद्य पदार्थों की एलर्जी में से एक है, जो विशेष रूप में बच्चों में देखने को मिलती है। इसके लक्षणों में पित्ती, सूजन, नाक बंद होना, उल्टी या एनाफिलेक्सिस शामिल हैं। विभिन्न अध्ययनों में सफेद अंडे में एलर्जी युक्त प्रोटीन की जानकारी दी जाती है। यह जानकारी इसकी पहचान और उपचार में सहायक साबित हो सकती है।
- बायोटिन की कमीः सफेद अंडे में एविडिन नामक प्रोटीन होता है, जो बायोटिन (एक बी विटामिन) से संबंधित है। यदि इसका अत्यधिक सेवन किया जाए तो इससे बायोटिन की कमी हो सकती है। आमतौर पर यह एक दुलर्भ समस्या है, जो लंबे समय तक इसका सेवन करने पर ही होती है। इस स्थिति में, पके हुए सफेद अंडे का सेवन किया जा सकता है, जिससे एविडिन नष्ट हो सकते है और बायोटिन पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो सकता है।
- एविडिन-प्रेरित एंटीबॉडीः कुछ अध्ययनों से स्पष्ट है कि कच्चे सफेद अंडे के सेवन से एविडिन के खिलाफ एंटीबॉडी का उत्पादन हो सकता है, जो संभावित रूप से ऑटोइम्यून प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकती है। इसके विपरीत, पके हुए सफेद अंडे में एविडिन की मात्रा कम होती है, जिससे अंडे से संबंधी समस्याओं के होने का जोखिम कम हो सकता है।
- खाद्य जनित बीमारी का जोखिमः कच्चे या अधपके अंडे का सेवन करने से खाद्य जनित बीमारी का जोखिम होता है, इसका मुख्य कारण साल्मोनेला संदूषण है। अत:अंडे को अच्छी तरह से पकाने से यह खतरा कम हो सकता है।
- प्रोटीन की अधिकता: हालांकि, प्रोटीन समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन से गुर्दे पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप गुर्दे संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यह समस्या मुख्य रूप से गुर्दे रोगियों को हो सकती है। इसके अतिरिक्त, प्रोटीन से भरपूर आहार गुर्दे पर अत्यधिक दबाव डाल सकता है, जिससे गुर्दे खराब (kidney damage) की समस्या हो सकती है।
उपरोक्त दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानने के लिए शोध किया जा रहे हैं। अत: इसका सेवन करने से पहले विभिन्न कारकों पर ध्यान देना आवश्यक है। इनमें एलर्जी, आहार संबंधी प्राथमिकता और समग्र पोषण सेवन शामिल हैं।
सफेद अंडे की एलर्जी होने की संभावना किन लोगों में अधिक होती है?
हालांकि, सफेद अंडे की एलर्जी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन इसकी संभावना बच्चों, बूढ़ों, गर्भवती महिलाओं और किसी अन्य रोग से पीड़ित लोगों में अधिक रहती है। इसका मुख्य कारण साल्मोनेला एंटरटिडिस (Salmonella enteritidis) है, जो कच्चे अंडे में पाया जाता है। अत: यदि कोई व्यक्ति किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित है, तो इससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोरी हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप, उसे यह एलर्जी होने की संभावना अधिक रहती है। इसके अतिरिक्त, अन्य खाद्य एलर्जी से पीड़ित लोगों को भी यह एलर्जी हो सकती है। इसके अलावा, एलर्जी, अस्थमा या एक्जिमा के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में यह एलर्जी हो सकती है। जैसा कि पहले बताया गया है कि सफेद अंडे की एलर्जी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। अत: सभी लोगों को कच्चे अंडों से बने खाद्य पदार्थों, जैसे कच्चे आटा के बिस्कुट, सीज़र सलाद या घर पर बना मेयोनेज़ का परहेज करना चाहिए।
ध्यान दें: अंडे को अच्छी तरह से पकाने से कीटाणु मर जाते हैं और वह सुरक्षित बन जाता है।
क्या कोई भी व्यक्ति सफेद अंडे का सेवन कर सकता है?
हां, इसका सेवन कोई भी व्यक्ति कर सकता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक, कैलोरी की मात्रा कम होती है और इसमें राइबोफ्लेविन तथा सेलेनियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी होते हैं। इसके अतिरिक्त, इसका प्रयोग सभी व्यंजनों में किया जा सकता है।
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