सोया के पत्ते: स्वास्थ्य लाभ, पोषक तत्व और उपयोग 

dill leaves benefits

सोया के पत्तों की उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है लेकिन कई अन्य जड़ी बूटियों की तरह ही इसकी उत्पत्ति भूमध्यसागरीय क्षेत्र में हुई है। दिलचस्प बात यह है कि यह यूरोप के कुछ हिस्सों में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली सुगंधित जड़ी बूटियों में से एक है। इसे कुछ पूर्वी यूरोपीय देशों में अजमोद या धनिया से ज्यादा पसंद किया जाता है। भारत में भी सोया के पत्ते का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है। इसे बंगाली में ‘शोल्पा’, हिंदी में ‘सावा’ और पंजाबी में ‘सोआ’ कहा जाता है। हालांकि सोया के पत्तों के साथ एक समस्या यह है कि वे अपनी सुगंध बहुत जल्दी खो देते हैं। 

स्वास्थ्य लाभ

सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्रोत

सुगंधित जड़ी-बूटियों का सेवन अत्याधिक मात्रा में नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे कई मैक्रोन्यूट्रिएंट्स प्रदान नहीं कर सकते हैं। हालांकि, सोया के पत्तों का नियमित उपयोग कई महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान कर सकता है। सोया के पत्ते राइबोफ्लेविन, नियासिन, फोलेट और विटामिन सी से भरपूर होते हैं। ये कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज और पोटेशियम का भी अच्छा स्रोत माने जाते हैं।

तनाव को कम करता है

सोया के पत्तों पर काफी कम अध्ययन किया गया है इसलिए इसके लाभ के बारे में अधिक जानकारी का अभाव है। हालांकि मनुष्यों ने सबसे पहले सोया के पत्तों का उपयोग सुगंध के कारण करना शुरू किया था। इसकी सुगंध नसों को आराम दे सकती है, चिंता को कम कर सकती है, मनोदशा में सुधार कर सकती है और भूख को बढ़ा सकती है।  

वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए कहा जा सकता है कि सोया के पत्तों का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है।

एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत

सोया के पत्ते केवल पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा नहीं हैं क्योंकि यह आम आयुर्वेदिक उपचारों में से एक है। हालांकि यह संभावना है कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ एंटीऑक्सीडेंट प्रवृत्ति के कारण हो सकते हैं। हाल के वर्षों में एंटीऑक्सीडेंट में काफी रुचि विकसित हुई है। हालांकि, इन दिनों आहार असंतुलन और मानसिक तनाव के कारण लोगों में पुरानी गैर-संक्रामक बीमारियों के विकसित होने की संभावना बढ़ गई है। एंटीऑक्सीडेंट मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों, हृदय रोगों, मस्तिष्क विकारों और यहां तक कि कैंसर को रोकने में मदद कर सकते हैं। 

शोधकर्ताओं ने सोया के पत्तों में कई एंटीऑक्सीडेंट को खोज निकाला है। इनमें फ्लेवोनोइड्स, टेरपेन्स, फेनोलिक एसिड, स्टेरॉयड और कौमरिन होते हैं। इसकी सुगंध अल्फा-फेलैंड्रीन, लिमोनेन, डिल ईथर और मिरिस्टिसिन के कारण हो सकती है।

हृदय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

हृदय रोग दुनिया भर में मृत्यु का प्रमुख कारण है। हालांकि दक्षिण एशियाई लोग विशेष रूप से इस स्थिति से ग्रस्त हैं। अध्ययन से पता चला है कि भारतीय खराब कोलेस्ट्रॉल के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और इस प्रकार धमनियों के अवरुद्ध होने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा यह कोई रहस्य नहीं है कि भारत में उच्च रक्तचाप भी काफी आम है।

सोया के पत्ते हृदय को कई तरह से लाभ पहुंचा सकते हैं। यह मनोदशा में सुधार करने, तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं और रक्तचाप को कम करने में भी असरदार हो सकते हैं।

सोया फ्लेवोनोइड्स से भरपूर होता है, जो प्रत्यक्ष कार्डियोप्रोटेक्टिव क्रिया के लिए जाना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट का अधिक सेवन निम्न-श्रेणी की सूजन को कम करने में भी मदद करता है और इस प्रकार हृदय रोग के खतरे को कम करता है।

सोया के पत्ते खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि सोया के पत्ते कोलेस्ट्रॉल को कम करने में असरदार होते हैं। नैदानिक अध्ययनों से पता चला है कि सोया के पत्ते कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम कर सकते हैं। हालांकि सोया के पत्ते एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं, जो कि एक अच्छा कोलेस्ट्रॉल है।

मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक

मधुमेह केवल उच्च कार्ब या शर्करा के सेवन का परिणाम नहीं है। यह अन्य कई कारणों से भी होता है। जैसे – व्यायाम की कमी, तनाव, खराब सूक्ष्म पोषक तत्वों की खपत आदि। इसका मतलब है कि मधुमेह को नियंत्रित करने का कोई एक खास तरीका नहीं है। 

आमतौर पर, मधुमेह से पीड़ित लोगों को जीवनशैली में सुधार करने पर विचार करना चाहिए, जिसमें महत्वपूर्ण आहार परिवर्तन और व्यायाम शामिल हैं। जब तक आप उन्हें बड़ी मात्रा में सेवन करने की योजना नहीं बना रहे हैं, तब तक सोया के पत्तों से रक्त शर्करा के स्तर को काफी कम करने की उम्मीद ना करें। फिर भी, अध्ययन से पता चला है कि सोया के पत्तों जैसी सुगंधित जड़ी बूटियों को जोड़ना रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य करने के स्वस्थ तरीकों में से एक हो सकता है।

यह जानना जरुरी है कि सोया के पत्ते ना केवल रक्त शर्करा के स्तर पर उनके प्रभाव के कारण मदद करते हैं बल्कि ये एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। इसका मतलब है कि सोया के पत्ते मधुमेह से जुड़ी विभिन्न जटिलताओं के जोखिम को कम करने में भी मदद कर सकते हैं।

कैंसर से बचाव में मददगार

सोया के पत्तों के अनेक लाभ हैं क्योंकि वे एंटीऑक्सीडेंट और टेरपेन से भरपूर होते हैं। नए अध्ययन से पता चला है कि यह कैंसर को रोकने के लिए काफी अच्छा हो सकता है इसलिए सोया के पत्ते स्तन कैंसर, आंत का कैंसर (colon cancer) और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।

यह भी संभव है कि भूमध्यसागरीय क्षेत्र में कुछ प्रकार के कैंसर का कम प्रसार विभिन्न सुगंधित जड़ी बूटियों के अधिक सेवन के कारण होता है।

अन्य लाभ

विज्ञान ने सोया के पत्तों के सभी स्वास्थ्य लाभों की पर्याप्त खोज नहीं की है। फिर भी, कुछ अध्ययन से पता चला है कि सोया के पौधे में निहित आवश्यक तेल (essential oils) संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकते हैं। सोया के पत्ते हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छे होते हैं क्योंकि उनमें एक उत्कृष्ट पोषण क्षमता होती है। सोया के पत्तों में निहित आवश्यक तेल में स्पास्मोलिटिक यौगिक होते हैं जो मासिक धर्म की ऐंठन को कम करने में भी मदद कर सकता है,।

निष्कर्ष

स्वस्थ रहने, तनाव को कम करने, रक्तचाप को कम करने और विभिन्न चयापचय संबंधी विकारों के जोखिमों को कम करने के लिए सोया के पत्तों का एक अहम योगदान हो सकता है। हालांकि यह आवश्यक है कि हम खुद को केवल कुछ जड़ी-बूटियों के उपयोग तक सीमित न रखें। 

Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.