किराये की कोख से भी ज्यादा विस्तृत है Surrogacy का दायरा

सरोगेसी आज कई लोगों के लिए विकल्प है तो कई लोगों की पसंद मगर सरोगेसी में भी कई जटिलताएं हैं. इस आलेख के माध्यम से हमने कई बिंदूयों पर छूने का प्रयास किया है, जो आपके लिए जरुरी हो सकती हैं..

Surrogacy

आपको कृति सेनन की फिल्म मिमी याद होगी, जिसका सपना फिल्मों में एक्टिंग करना होता है लेकिन आर्थिक तंगी होने के कारण वह मुंबई नहीं जा पाती है और उसके बाद एक अंग्रेज दंपति के बच्चे की सरोगेट मदर बनती है।

साधारण भाषा में सरोगेसी का मतलब किराये की कोख से है। सरोगेसी का विकल्प उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है, जो प्रजनन संबंधी परेशानी जैसे – गर्भपात, गर्भधारण करने में दिक्कत, आदि से बचना चाहती हैं। अब तो कामकाजी महिलाएं जो नौ महीने तक गर्भधारण नहीं कर सकती वे भी समय के अभाव के कारण सरोगेसी का विकल्प अपना रही हैं। जो महिला किसी दंपती के बच्चे को नौ महीने तक अपने गर्भ में रखती है, उसे सरोगेट मदर कहा जाता है। 

यहां तक की असल जीवन में भी कई मशहूर हस्तियां सरोगेसी का माध्यम अपना रही हैं। जैसे – शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा, करण जौहर, तुषार कपूर, एकता कपूर आदि।

सरोगेसी एक बेहद गंभीर विषय है और कई बार सरोगेसी को लेकर विवाद भी खड़े हुए हैं। दक्षिण फिल्मों के कलाकार नयनतारा-विग्नेश भी सरोगेसी का कारण ही सुर्खियों में थे क्योंकि उन्होंने शादी के पांचवें हफ्ते में ही अपने माता-पिता बनने की खबर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी। हालांकि सरकार के दखल के बाद जांच हुई और अंत में नयनतारा-विग्नेश को क्लीनचिट मिल गई। जांच में सामने आया कि नयनतारा-विग्नेश के बच्चे की सरोगेट मदर बनने की प्रक्रिया मार्च 2022 में शुरु हुई थी।। साथ ही पता चला कि नयनतारा-विग्नेश की शादी 6 साल पहले ही रजिस्टर हो चुकी थी और कपल ने दिसंबर 2021 में सरोगेसी के लिए रजिस्टर किया था। ये काम भारत में कमर्शियल सरोगेसी बैन होने से हफ्तों पहले हुआ था। 

सरोगेसी के चार प्रकार 

सरोगेसी को चार प्रकार में विभाजित किया जाता है। 

  1. ट्रेडिशनल सरोगेसी – इसमें एक संतानहीन दम्पति एक सरोगेट की सहायता से बच्चा प्राप्त कर सकते हैं। यहाँ सरोगेट मदर ही बच्चे की बॉयोलोजिकल मदर भी होती है। ऐसी स्थिति में बच्चे के ऊपर सरोगेट माँ का भी कानूनी अधिकार माना जाता है।  
  1. जेस्टेशनल सरोगेसी – इसमें सरोगेट मदर बच्चे की बॉयोलोजिकल मदर नहीं होती बल्कि उसकी केवल कोख होती है और वे सिर्फ बच्चे को जन्म देती है। इसमें पैदा होने वाले बच्चे के पिता के स्पर्म और माता के एग्स का मेल या डोनर के स्पर्म और एग्स का मेल टेस्ट ट्यूब में कराने के बाद इसे सरोगेट मदर के Uterus में implant कर दिया जाता है इसलिए इस जटिल प्रक्रिया कहा जाता है। भारत में जेस्टेशनल सरोगेसी ही ज्यादा होती है क्योंकि इसमें विवाद का खतरा कम होता है।   
  1. परोपकारी सरोगेसी (Altruistic Surrogacy) – इसमें सरोगेट मदर संतानहीन दंपति की जान-पहचान या कोई अनजान महिला भी हो सकती है जो मदद करती है। 
  1. कमर्शियल सरोगेसी (वाणिज्यिक सरोगेसी)- भारत में कमर्शियल सरोगेसी कई कारणों से बैन है क्योंकि इसमें सरोगेट मदर को पैसे दिए जाने का प्रावधान है। कोख का व्यापार ज्यादा ना हो और सरोगेसी का गलत तरीके से उपयोग ना हो इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। 

सरोगेसी की जटिलताएं व चुनौतियां

सरोगेसी में ना केवल मेडिकल बल्कि कई भावनात्मक जटिलताएं भी शामिल हैं। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 के अनुसार, वह महिला जो 35 से 45 वर्ष की आयु के बीच विधवा या तलाकशुदा है या कानूनी रूप से विवाहित महिला और पुरुष के रूप में परिभाषित युगल सरोगेसी का लाभ उठा सकते हैं। इसमें कमर्शियल सरोगेसी पर प्रतिबंध है, जो 10 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडनीय है। कानून केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है, जहां कोई पैसे का आदान-प्रदान नहीं होता है। 

सरोगेसी में भी कई चुनौतियां हैं। जैसे – पितृसतात्मक ढांचा मजबूत होना क्योंकि महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का कानूनन कोई प्रावधान नहीं है। गरीब महिलाओं का शोषण रुके, इस पर भी सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि कई बार गैर-कानूनी कार्य अंजाम दे दिए जाते हैं। साथ ही महत्वपूर्ण बात है किसी सरोगेट मदर का भावमात्मक जुड़ाव हो जाना क्योंकि नौ महीने एक सांस के साथ रहना फिर दर्द सहकर उसे अलग कर देना भी एक भावनात्मक जटिल स्थिति है। साथ ही परोपकारी सरोगेसी में किसी तीसरे पक्ष की कोई भागीदारी नहीं होती, जिसे मौजूदा कानून निवारण करने में विफल है। 

स्वयं को रखें ईमानदार 

सरोगेसी की कई कमियां भी हैं। जैसे – लिव-इन (Live-in) में रहने वाले, ट्रांसजेंडर और समलैंगिक (चाहे विवाहित या लिव-इन में रहने वाले) जोड़ों को सरोगेसी का लाभ नहीं मिल पाता। साथ ही सरोगेसी के नाम पर होने वाले गैर-कानूनी कार्य एवं आर्थिक खर्चे भी असीमित हैं। 

सरोगेसी कई लोगों के जीवन में वरदान बनकर सामने आया है, तो वही् इसकी कई चुनौतियां भी है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इससे भी ज्यादा जरुरी है, सरोगेसी का लाभ ले रहे लोग, सरोगेसी का विकल्प उपलब्ध कराने वाले अस्पताल और सरोगेसी का विकल्प चुनने वाली महिलाओं का ईमानदार होना अनिवार्य है क्योंकि सरोगेसी केवल किराये की कोख नहीं है बल्कि यह एक जिम्मेदारी है, जिससे कई जिंदगियां जुड़ी होती हैं। 

Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.