ग्रामीण युवाओं की सेहतमंद पहल Medishala, अब गांवों में हो सकेगा सही इलाज

चार युवाओं की एक सेहतमंद पहल है मेडिशाला। जानिए इस पहल से जुड़े उद्देश्यों और संघर्ष की कहानी ...



“आवश्यकता आविष्कार की जननी है” इस कथन को बिहार के रहने वाले चार युवाओं ने सच करके दिखाया है। मरीजों और डॉक्टरों के बीच की दूरी और ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों की परेशानियों को भांप कर इन्होंने शुरु की है अपनी एक अनोखी कहानी। 

जिस प्रकार घर में कोई जरुरी सामान ना मिलने पर मां की याद आती है, उसी प्रकार सेहत बिगड़ने पर सबसे पहले डॉक्टर की याद आती है लेकिन डॉक्टर से मिलने से पहले उन औपचारिकताओं की याद आते ही मन खट्टा हो जाता है जैसे पहले लाइन में लगकर नंबर लेना, अपनी बारी का इंतजार करना, पर्चा लेकर दवाई के लिए दर-दर भटकना और तब वापस आना। उफ्फ, सोचकर ही लगता है कि रहने देते हैं, शायद बीमारी खुद ही ठीक हो जाएगी लेकिन एक पल रुक कर सोचिए कि डॉक्टर से मिलने के लिए ये सारी औपचारिकताएं अगर घर बैठे अपने मोबाइल फोन से बिल्कुल उसी तरह हो जाए, जिस प्रकार आप कोई खाना या कपड़ा ऑर्डर करते हो, तो कितना आसान होगा और समय की बचत भी हो जाएगी। 

आइये बात करते हैं ग्रामीण क्षेत्र के चार युवाओं की जिन्होंने मरीजों और डॉक्टरों के बीच की इस गहराई को पाटने का काम किया है। रांची के रहने वाले ऋतुराज स्वामी, बिहार के समस्तीपुर जिले के सुमन सौरभ, सिवान जिले के मोहम्मद अमनुल्लाह और नालंदा जिले में स्थित हिलसा के प्रिंस कुमार ने अपने परिजनों को घंटों लाइन में लगता देख मेडिशाला (Medishala) की नींव रखी, जिसके द्वारा मरीज घर बैठे डॉक्टरों के यहां नंबर लगा सकते हैं और अगर चाहे तो वीडियो कॉल के जरिए भी डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं। 

परिवार और दोस्तों से मिली मदद 

इन चारों दोस्तों की मुलाकात बीआईटी मेसरा के पटना कैंपस में हुई थी। ग्रामीण परिवेश से निकल कर शहरी परिवेश में बसने के कारण घर से बार-बार डॉक्टरों के यहां नंबर लगाने के लिए कहा जाता था क्योंकि गांवों में डॉक्टरों की सुविधा उपलब्ध नहीं थी और बार-बार नंबर लगाने के लिए घर वालों का इतनी लंबी दूरी तय करना भी तर्क-संगत नहीं लगता था। इन्हीं सब कारणों से मेडिशाला का ख्याल आया और साल 2019 में परिवार और दोस्तों से 20 लाख रुपये लेकर इन्होंने अपने एप की शुरुआत की। 

को-फाउंडर मो. अमनुल्लाह बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को स्मार्टफोन और एप को इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में जानकारी देने में हुई क्योंकि गांवों से आने वाले लोगों को फोन लगाने और फोन उठाने के अलावा ज्यादा जानकारी नहीं होती है। इसके साथ डॉक्टरों के साथ सामंजस्य बिठाना भी एक चुनौती है क्योंकि अगर कोई डॉक्टर सुबह 10 बजे से मरीजों के इलाज के लिए बैठते हैं, इसका मतलब होता है कि पहले से उनके पास 5-10 मरीजों ने अपना नंबर लगा लिया है। ऐसे में अगर कोई मरीज मेडिशाला एप के जरिए नंबर लगाकर वहां पहुंचते हैं, जिन्हें तुरंत अपना इलाज डॉक्टर से मिल कर या वीडियो कॉल पर कराना होता है, तब डॉक्टरों को समय प्रबंधन करने में परेशानी होती है। हालांकि इसके लिए हमने कुछ उपाय किए हैं ताकि डॉक्टरों को भी दिक्कत का सामना ना करना पड़े और मरीजों का इलाज भी सही तरीके से हो जाए। 

डिजिटल माध्यम से होगा मरीजों का इलाज 

ऍप के जरिये स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारी के अतिरिक्त इन चारों द्वारा बिहार के दो जिलों – समस्तीपुर और बरहिया में मेडिशाला ई-क्लीनिक (डिजिटल क्लीनिक) भी खोला गया है, जहां से मरीज प्रारंभिक जांच व दवाओं आदि की जानकरी प्राप्त कर सकते हैं। इन क्लीनिक्स में करीब 25 स्टॉफ भी काम कर रहे हैं। यदि कोई मरीज स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहता है, तो वह मरीज इन ई-क्लीनिक पर पहुंच कर अपना इलाज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करा सकते हैं। यहां नामी-गिरामी डॉक्टरों की लिस्ट होती है, जिनमें से कौन से डॉक्टर ऑनलाइन उपलब्ध हैं, इसका पता लगाने के बाद मरीज सीधे तौर पर उनसे जुड़ जाते हैं। यहां मौजूद स्टाफ इन सारी प्रक्रियाओं में मरीजों की पूरा सहायता करते हैं।

प्रतिस्पर्धा निखारने का काम करती है

मेडिशाला टीम बताती है कि हमारी प्रतिस्पर्धा स्वास्थ्य सेवा देने के नाम पर ठगी करने वालों से भी है, जो लोगों से डॉक्टरों से इलाज कराने के नाम पर ठगी कर लेते हैं इसलिए हम लोगों को सही-गलत के बीच का फर्क भी बताते हैं। चुंकि डॉक्टरों के यहां नंबर लगाने आए मरीजों में 70 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखते हैं इसलिए यदि उन्हें डॉक्टरी सुविधा हम घर बैठे दे पा रहे हैं, इसका मतलब हमने ना केवल एक मरीज को समय पर इलाज मुहैया कराया है बल्कि यात्रा के खर्चों को भी कम किया है, जिससे वे इन बचे हुए पैसों से अपना खान-पान या अन्य जरुरी काम कर सकते हैं। 

डॉक्टर मरीजों को इलाज के बाद ऑनलाइन ही पर्चा भेज देते हैं। अब आगे हमारा उद्देश्य कम से कम 100 फार्मेसी खोलने का भी है, जहां से मरीज आसान तरीकों से अपनी दवाई भी मंगवा सके। मेडिशाला टीम का मानना है कि सेहतमंद प्रतिस्पर्धा आपकी कमियों को समाप्त करने का काम करती है इसलिए किसी को भी प्रतिस्पर्धा या चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए। 

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार बिहार में 12 करोड़ की आबादी पर 1,19,000 डॉक्टर हैं, लगभग तय मानकों के अनुरुप ही हैं। हालांकि आगे आने वाले समय में डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जाएगा। वहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार 1000 लोगों की आबादी पर 1 डॉक्टर का होना अनिवार्य होता है। बिहार में 12 करोड़ की आबादी पर लगभग 1,19,000 डॉक्टर हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा है आगे आने वाले समय में डॉक्टरों की कमी को शीघ्र पूरा किया जाएगा।

बहरहाल, मेडिशाला की टीम अपने पूरे लगन से लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का काम कर रही है। इस कड़ी में कोरोना के दौरान लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाएं मुहैया कराना भी शामिल है। 

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