जानिए कैसे मेटाबोलिज्म से जुड़ा है होली का त्यौहार

होली रंगों का त्यौहार है इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए पूरी सावधानी के साथ होली खेलें।

होली उल्लास का त्यौहार माना जाता है लेकिन 21 वर्षीय डॉली को होली आते ही इस बात का डर सताने लगता है कि कहीं उसे पिछली बार की तरह फिर से त्वचा का संक्रमण और एलर्जी ना हो जाए क्योंकि होली के नाम पर रंगों में होने वाले मिलावट और नकली रंगों के कारण बहुत परेशानी उठानी पड़ जाती है। ऐसा केवल डॉली के साथ ही नहीं पर हम में से कई लोगों के साथ ऐसा होता है क्योंकि होली पर रंगों का उत्साह सेहत ख़राब होने पर फीका पड़ जाता है।

मेटाबोलिज्म से जुड़ी है होली

डॉ. क्रांति चंदन जयकर

पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. क्रांति चंदन जयकर बताते हैं कि आजकल बाजार में काफी नकली रंग मिलते हैं, जिनमें लेड और क्रोमेट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन इसमें भी जो लोग पहले से थायराइड, ब्लड प्रेशर, अपच, डायबिटीज, अस्थमा या हार्ट की बीमारी से ग्रसित रहते हैं, उन्हें ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है क्योंकि इन बीमारियों से ग्रसित लोगों का मेटाबॉलिज्म स्थिर नहीं रहता है। साथ ही एलर्जी और संक्रमण की समस्या ज्यादा देखी जाती है क्योंकि उनके अंदर C- reactive प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। इन सब परेशानियों से बचने के लिए Non-Soap Cleanser अर्थात साबुन रहित क्लींजर का इस्तेमाल करना बेहतर होता है क्योंकि ये चेहरे की नमी को बनाए रखते हुए चेहरे पर जमे रंगों, धूल आदि की सफाई कर देता है। इन साबुन में Cetyl Alcohol & Stearyl Alcohol होता है। साथ ही रंग खेलने से पहले चेहरे और शरीर के खुले भागों में विटामिन-ई युक्त मॉइश्चराइजर को लगा लेना बेहतर होता है क्योंकि ये रंगों और त्वचा के बीच एक अवरोध की तरह काम करता है, जिससे रंग का असर त्वचा पर नहीं पड़ता है।

अंदरुनी त्वचा का रखें ख्याल

होली के दौरान ना केवल बाहरी त्वचा बल्कि अंदरूनी त्वचा का ध्यान रखना भी जरुरी होता है क्योंकि कई बार होली खेलते वक्त आंखों में रंग चला जाता है, जिससे आंखों में संक्रमण, सूजन और जलन हो जाती है। इस समय प्राथमिक उपचार के लिए आंखों को ठंडे पानी से धोना चाहिए और गीले कपड़े को भिगोकर आंखों पर रखकर छोड़ देना चाहिए ताकि जलन कम हो। वहीं अगर इन सब उपायों को करने पर भी आराम ना महसूस हो और रंग कोर्निया (आंखों में मौजूद सबसे छोटी काली पुतली) तक पहुंच जाए, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि कोर्निया डैमेज होने से अंधापन हो सकता है। साथ ही होली आने से पहले घर में आर्टिफिशियल टियर लुब्रिकेंट आई ड्रॉप्स 0.5 oz लाकर रख लें ताकि कोई भी समस्या महसूस होने पर उसकी दो बूंद आंखों में डाल लें लेकिन कोर्निया के केस में तुरंत डॉक्टर के पास जाना ही सही कदम है।  

कोल्ड ड्रिंक को कहे ना 

डॉ. सुमिता कुमारी

डायबिटीज एंड ओबेसिटी केयर सेंटर पटना की फाउंडर डाइटिशियन डॉ. सुमिता कुमारी बताती हैं कि बदलती जीवन शैली के कारण अब लोग ज्यादा शारीरिक व्यायाम नहीं कर रहे हैं, जिससे उनके अंदर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती जा रही है। वहीं होली के दौरान लोगों का खानपान बहुत गरिष्ठ हो जाता है, जिससे उनके शरीर में गलत (bad) कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है और होली के दौरान शुगर, बीपी की समस्या बढ़ जाती है। इसके लिए बेहतर है कि होली का मजा फीका ना हो इसलिए होली से पहले और होली के बाद कम-से-कम एक घंटा जरूर टहला जाए। साथ ही गरिष्ठ भोजन कम करने के लिए हरी-पत्तेदार सब्जियां, पालक का साग, मौसमी सब्जियों व फलों का सेवन करना चाहिए।

आमतौर पर लोग होली के समय कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने लगते हैं लेकिन इससे बेहतर है कि होली के समय छाछ या लस्सी का सेवन किया जाए क्योंकि डब्बा बंद कोल्ड ड्रिंक्स में Phosphoric acid, चीनी और कैफीन आदि अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इंसुलिन का स्तर गड़बड़ा जाता है और पेट की समस्याएं भी बढ़ जाती है। साथ ही अगर मीठा खाना भी चाहते हैं, तो बेहतर है कि शुगर फ्री खाया जाए।  

होली रंगों का त्यौहार है इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए पूरी सावधानी के साथ होली खेलें। अगर संभव हो, तो भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने पर जरूर लगाए व सामाजिक दूरी बनाये रखें।  

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