सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है स्वास्थ्य संबंधी भ्रम जाल

मोटापा घटाने, बाल, वजन व सेक्सुअल पॉवर बढ़ाने, कैंसर के इलाज के झूठे दावों के कारण लोग पड़ रहे नीम हकीमों के चक्कर में

राजस्थान के हनुमानगढ़ मेंं एक मेडिकल स्टोर पर महेश नामक युवक विक्स वेपोरब खरीदने के लिए आया। वह कई दिनों से बार-बार विक्स खरीद कर ले जा रहा था। अंततः मेडिकल स्टोर संचालक से रहा नहीं गया और उसने युवक से बार-बार विक्स खरीदने का कारण पूछा। महेश ने जो वजह बताई, उसे सुनकर मेडिकल स्टोर संचालक हैरान रह गया। महेश का कहना था कि वह अपना बढ़ा हुआ पेट घटाने के लिए विक्स वेपोरब की मालिश कर रहा है। उसने यू-ट्यूब पर एक वीडियो देखा, जिसमेंं सरसों के तेल में विक्स वेपोरब मिला कर मालिश करने की सलाह दी गई। वीडियो में दावा किया गया कि ऐसा करने से बढ़ा हुआ पेट गायब हो जाएगा। महेश का कहना था कि वह कई दिनों से रात को सोते समय पेट पर विक्स और तेल मल रहा है मगर अभी तक कोई फर्क नहीं पड़ा है।

महेश की बात सुनकर आप भले ही हैरान हो रहे हों मगर उस जैसे लाखों युवा सोशल मीडिया पर किए जा रहे इस तरह के अवैज्ञानिक प्रचार के चक्कर में पड़ रहे हैं। जिस वीडियो से महेश प्रभावित हुआ, उसका शीर्षक है – ”रात में लगा लो, पेट की चर्बी बर्फ की तरह पिघल जाएगी। हफ्ते भर में 10 किलो वजन कम करें।”  इस वीडियो को अब तक लगभग 25 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं। इनमें से कितने लोग मोटापा घटाने के लिए विक्स वेपोरब का इस्तेमाल करने लगे होंगे, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल नहीं है।

इस तरह के अनेक वायरल वीडियो हैं, जिनमें मोटापा दूर करने के लिए गलत सूचनाओं का सहारा लिया गया है। यूट्यूब पर ऐसे वीडियोज की भरमार है, जिनमें मोटापा घटाने, लंबाई बढ़ाने और यौनशक्ति बढ़ाने के कथित कारगर तरीके बताए गए हैं। इनमेंं अपने आपको हकीम और वैद्य बताने वाले लोग कई तरह के नुस्खे बता कर यौनशक्ति ‘घोड़े’ की तरह बढ़ जाने का दावा करते हैं। एक वीडियो का तो शीर्षक ही यही है कि ‘दस रुपये की इस देसी दवा से जितना मर्जी वजन बढ़ाएं’। एक अन्य वीडियो का शीर्षक दावा करता है कि रात को इन दो चीजों को मिला कर पी लो, सुबह तक पेट की चर्बी खल्लास। बाल बढ़ाने का दावा करने वाले एक वीडियो को यूट्यूब पर 48 मिलियन लोग देख चुके हैं क्योंकि इस वीडियो का शीर्षक  है – ‘डॉक्टर भी हैरान हैं एक दिन में यह चीज लगाकर 10 गुना बालों की लंबाई बढ़ता देखकर’। कैंसर के उपचार संबंधी तरीकों का भी सोशल मीडिया पर सैलाब आ चुका है। कोरोना काल में कई तरह के भ्रम फैलाए गए हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा है।

यूट्यूब पर हर बीमारी का चमत्कारिक इलाज

कुल मिला कर कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसका चमत्कारिक इलाज सोशल मीडिया पर न बताया जा रहा हो। लंबाई, वजन व सेक्सुअल पॉवर बढ़ाने और मोटापा घटाने के लिए अवैज्ञानिक तौर-तरीकों का प्रचार किया जा रहा है, जिनके प्रभाव में आ कर युवा वर्ग नीम हकीमों के चक्कर काट रहा है। सही स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं के अभाव में जहां युवा लड़के-लड़कियां जेब हल्की करवा रहे हैं, वहीं अपने स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल रहे हैं। संगरिया निवासी परेश नामक युवक ने Whatsapp पर एक वीडियो देख कर एक नीम हकीम से मंगवा कर वजन बढ़ाने की दवा खा ली। इसके साइड इफेक्ट्स उसे लंबे समय तक झेलने पड़े। परेश के जिस्म पर सूजन आ गई। जिसके इलाज के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ी, वह अलग।  

सर्वाधिक झूठी खबरें हैं स्वास्थय से सम्बंधित

डॉ. एनपी सिंह

श्रीगंगानगर के राजकीय अस्पताल के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट (होम्योपैथी) डॉ. एनपी सिंह कहते हैं, ”वैसे तो ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जिससे संबंधित झूठी सूचनाओं का सोशल मीडिया पर प्रसार न किया जा रहा हो, लेकिन स्वास्थय संंबंधित फर्जी सूचनाएं सर्वाधिक फैलाई जा रही हैं। ”

दिसम्बर 2021 में ढाका विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने फेक न्यूज पर एक अध्ययन में पाया कि सोशल मीडिया पर 67 प्रतिशत फर्जी समाचार स्वास्थय से संबंधित होते हैं। ऐसे फर्जी समाचारों में दवा, चिकित्सा, स्वास्थ्य सुविधाएं, वायरल संक्रमण, डॉक्टर और मरीज से संबंधित मनगढंत बातें लिखी जाती हैं।

डॉ. सिंह कहते हैं कि सोशल मीडिया पर होम्योपैथिक दवाइयां का कोई साइड इफेक्ट्स न होने का दावा किया जाता है जो कि पूरी तरह गलत है। अगर बिना डॉक्टर के परामर्श के होम्योपैथिक दवाएं ली जाएं तो उनका दुष्प्रभाव संभव है। इससे शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

झूठी खबरें हैं स्वास्थय के लिए बड़ा खतरा

डॉ. पारस जैन

हनुमानगढ़ मेंं करीब पचास साल से प्रेक्टिस कर रहे कंसलटेंट फिजिशियन एवं जैन अस्पताल के संचालक डॉ. पारस जैन कहते हैं कि सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो रही फर्जी हेल्थ सूचनाएं और समाचार जन स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं। कई कथित डॉक्टर मरीज़ को आकर्षित करने, अपने प्रचार और सोशल मीडिया चैनल के प्रचार के लिए ऐसा करते हैं। लोग ऐसे फर्जी वीडियो में किए दावों से भ्रमित हो जाते हैं और इन नुस्खों का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिनसे नुकसान होना तय होता है।

डॉ. जैन कहते हैं, ”सोशल मीडिया पर जो फर्जी हेल्थ न्यूज आती हैं, उनमें अक्सर किसी न किसी फेमस डॉक्टर, अस्पताल का जिक्र होता है या फिर किसी फर्जी सर्वे आदि का हवाला दे दिया जाता है। जागरूकता के अभाव में आम लोग इन चीजों पर यकीन कर लेते हैं और उन्हें अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों को फॉरवर्ड भी कर देते हैं।”

ऐसे हालात के लिए देश में डॉक्टर्स की कमी जिम्मेदार है। देश में वैसे तो एलोपैथी, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और होम्योपैथी जैसी मान्यता प्राप्त प्रामाणिक चिकित्सा पद्धतियों से इलाज होता है लेकिन इसके बावजूद देश में हर 1,457 लोगों पर एक ही डॉक्टर है। डॉक्टर्स की कमी समस्या का कारण बन रही है क्योंकि जब भी लोगों को हेल्थ संबंधी कोई सूचना मिलती है तो लोगों के पास यह पता लगाने का कोई जरिया नहीं होता कि वह सूचना सही है अथवा गलत?

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