कम उम्र में मां बनना लड़कियों के लिए है हानिकारक

मां बनना सबसे सुखद एहसास होता है पर कुछ लड़कियों के लिए यह एक पीड़ादायक अवस्था है जो उनके लिए मानसिक व शारीरिक तौर पर असहनीय होती है। जानिए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य...

मां बनना सबसे सुखद एहसास होता है और अधिकांश महिलाएं एक निश्चित उम्र के बाद मातृत्व का सुख अवश्य महसूस करना चाहती हैं। हालांकि अब समय बदल रहा है और कई आधुनिक तकनीकों के आने के बाद अब बिना गर्भधारण किए भी मां बनने का सुख भोगा जा सकता है लेकिन अधिकांश हिस्सों में महिलाएं प्राकृतिक तरीकों से ही मां बनना पसंद करती हैं क्योंकि हर सुविधाएं, हर एक महिला को मिलना संभव नहीं है।

बहरहाल मां बनने के लिए पढ़े लिखे दम्पति स्वयं अपने लिए सही समय चुनते हैं लेकिन आज भी कई घर ऐसे हैं, जहां मां बनने का निर्णय केवल घर के पुरुषों के हाथों में होता है क्योंकि परिवार नियोजन में महिलाओं की भूमिका को शून्य बना दिया जाता है।

हाल में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट में ऐसी कई बातें सामने आई हैं, जिसने समाज को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में करीब 32.9 प्रतिशत लड़कियां 18 साल की दहलीज पार करने से पहले ही मां बन चुकी हैं। साथ ही गर्भधारण के शुरुआती 3 महीनों में करीब 55.9 प्रतिशत महिलाएं ही डॉक्टर के यहां अपने चेकअप के लिए गई थीं लेकिन इन आंकड़ों को देखकर सुकून महसूस करने की जरुरत नहीं है क्योंकि उसके बाद महिलाओं का डॉक्टर के पास जाने का आंकड़ा लुढ़क कर 28.2 प्रतिशत पर आ गया है। साथ ही इन महिलाओं के खाने में आयरन की मात्रा भी नगण्य है। एनएफएचएस सर्वे- 5 के आंकड़ों के अनुसार केवल 8.1 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने ही आयरन से भरपूर भोजन किया है।

एक ओर खेलने और पढ़ने की उम्र में लड़कियां मां बनने की जिम्मेदारियों को उठा रही हैं और दूसरी ओर उनके लिए कोई समुचित देखभाल की व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में कम उम्र में मां बनी लड़कियां अपने बच्चों की देखभाल कैसे कर पाएंगी?

मां बनने के लिए शरीर नहीं तैयार

डॉ. कल्पना सिंह

पटना की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. कल्पना सिंह बताती हैं कि कम उम्र में मां बनना लड़कियों के लिए बहुत हानिकारक साबित होता है क्योंकि मां बनने की जिम्मेदारियों को उठाने के लिए शरीर पूरी तरह से तैयार नहीं होता। 18 साल से कम उम्र में मां बनने से लड़कियों का शारीरिक विकास रुक जाता है। साथ ही बच्चे की डिलीवरी में भी दिक्कतें आती हैं। कम उम्र में शादी और बच्चों के होने के बाद लड़कियां ना अपनी देखभाल सही तरीके से कर पाती हैं और ना ही नवजात का ध्यान रख पाती हैं, जिस कारण समस्या गंभीर होते चली जाती है। साथ ही अत्याधिक रक्तस्त्राव होने के कारण एनीमिया अर्थात खून की कमी भी हो जाती है, जिससे लड़कियों का शरीर बेजान हो जाता है। एक तरफ बच्चे को स्तनपान कराना और दूसरी ओर खुद सही और पौष्टिक भोजन नहीं करना लड़कियों के लिए बहुत परेशानी का सबब बन जाता है। ऐसे में अगर परिवार का साथ भी ना मिले, तब जच्चा-बच्चा दोनों की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।

डॉ. बिंदा सिंह

मनोचिकित्सक डॉ. बिंदा सिंह बताती हैं कि लड़कियों का कम उम्र में मां बनना उन्हें भावनात्मक तौर पर भी कमजोर बना देता है। जब वे अपनी उम्र की अन्य लड़कियों को स्वच्छंदता और आजादी से घूमते-फिरते देखती हैं, तब कम उम्र में मां बनी लड़कियों के अंदर हीन-भावना उमड़ने लगती है, जो उन्हें अवसाद की गली में लाकर खड़ा कर देती है। साथ ही लड़कियों को सही उम्र में शिक्षित ना करना भी गंभीर समस्या को जन्म दे देता है।

स्वास्थ्य पर होता है प्रतिकूल प्रभाव

डॉ. कल्पना सिंह कहती हैं कि कम उम्र में गलत तरीके से गर्भपात कराने पर अत्याधिक रक्तस्त्राव होने लगता है, जिस कारण शरीर काफी कमजोर हो जाता है। कभी-कभी अगर भ्रूण का कोई अंश अंदर रह जाता है, तब कैंसर, इनफर्टिलिटी आदि की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

एक ओर जहाँ लड़कियों की अशिक्षा, सामूहिक विवाह, कमजोर आर्थिक स्थिति, बोझ समझे जाने के कारण कम उम्र में परिवार द्वारा शादी कर दी जाती है व वे मां बन जाती हैं, वहीं कुछ लड़कियां ऐसी भी हैं जो बाह्य दिखावे के चक्कर में व दोस्तों के दबाव में आकरअसुरक्षित सेक्स करके गर्भवती हो जाती हैं। इन दोनों केसों में लड़कियों को ही परेशानी उठानी पड़ती है क्योंकि समाज या घर-परिवार में सेक्स को लेकर बातें ही नहीं होतीं। जहां एक ओर पीरियड्स आने पर ही लड़कियों के ऊपर अनेक पाबंदियां लगा दी जाती हैं, ऐसे वातावरण में सेक्स को लेकर बातें केवल दबे स्वर या खुसर-फुसर में ही होती हैं।

एक बेहतर कल के निर्माण के लिए लड़कियों का सेहतमंद होना बहुत जरुरी है क्योंकि लड़कियां अगर स्वस्थ रहेंगी, तभी परिवार खुशहाल होगा और तरक्की के पथ पर आगे बढ़ेगा। साथ ही बच्चे कम उम्र में गलतियां करने से बचें इसके लिए स्कूलों के पाठ्यक्रमों में भी बदलाव करने की आवश्यकता है ताकि सेक्स, प्रेगनेंसी, मां बनने के समय बरती जानी वाली सावधानियां और देखभाल के बारे में बच्चों को पूरी तरीके से जागरूक किया जा सके। साथ ही माता-पिता भी अपने बच्चों के बदलते व्यवहार पर नजर रखें क्योंकि बच्चों के सबसे पहले दोस्त उनके माता-पिता ही होने चाहिए। 


हर मां ले एक सही निर्णय


लगभग 65 वर्षीय अनीता (बदला हुआ नाम) एक घरेलू कामगार महिला है, जो बेहद ग्रामीण इलाके से आती है। अनीता अपने बारे में बताती है कि वो करीब 12 साल की छोटी उम्र से ही घरों में काम कर रही है। उसकी शादी तब हो गई थी, जब वो करीब 15-16 साल की थी। उसके बाद भी उसने घरों में जाकर काम करना जारी रखा। जैसे- बर्तन धोना, पोछा लगाना आदि। इसी बीच वो गर्भवती भी हो गई, जिस कारण उन्हें घरों में जाकर काम करने में परेशानी होने लगी मगर पैसों के लिए काम करना छोड़ा भी नहीं जा सकता था। हालांकि कुछ घरों की मालकिनों ने काम कम कर दिया मगर पगार ठीक-ठाक दे दिए। गर्भावस्था के 8वें महीने में उन्होंने काम करना बंद कर दिया था। प्रसव का समय नजदीक आते-आते दर्द असहनीय होता था, जिसे बर्दाश्त करने में आंखों से आंसू आ जाते थे लेकिन 9वें महीने में बच्ची ने जन्म लिया और उसके बाद रक्तस्त्राव बढ़ गया। चूंकि दूर-दराज के इलाकों में डॉक्टरों की सुविधा भी नहीं मिलती है, जिस कारण महिलाएं ही प्रसव कराती है, जिस कारण भी तकलीफ बढ़ने का डर था। प्रसव के बाद तबीयत बहुत बिगड़ती चली गई। जैसे – शरीर कमजोर लगना, उंगलियों में दर्द, आलस आना, आदि। कुछ समय बाद जब तबीयत थोड़ी सुधरी, तब ही शहर जाकर डॉक्टर को दिखा सकी लेकिन कम उम्र में मां बनने से बहुत परेशानी उठानी पड़ी। अनीता ने कहा, “मुझे अपनी तकलीफों का अंदाजा है इसलिए मैंने अपनी बेटी की शादी 20 साल की होने के बाद ही करने का निर्णय ले लिया है।”

हर मां अपनी तकलीफों को भांपते हुए अपनी बेटी के लिए सही निर्णय ले और उस निर्णय के साथ खड़ी रहे, तब बेटियों की जिंदगी कम उम्र में खराब नहीं होगी। हालांकि मांओं को पहले स्वयं को मजबूती से ढालना होगा ताकि उनके द्वारा लिए गए निर्णयों में परिवार की भी सहमति शामिल हो। साथ ही शिक्षा और सही उम्र में अपनी बेटियों को सही जानकारी देकर भी मांएं अपनी बेटी के लिए एक उज्ज्वल भविष्य तैयार कर सकती हैं।  

Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

Subscribe to our newsletter

Stay updated about fake news trending on social media, health tips, diet tips, Q&A and videos - all about health