कोरोनावायरस के मारेला खातिर यूवी किरण: का सूरज के रोशनी असर ड़ाल सकेला?

Published on:

सारांश

सोशल मीडिया में एगो दवा करल जात रहे की यूवी किरण कोरोनावायरस के मार सकेला। हमनी के दावा के की पड़ताल करनी तो पालगाइल की ई आधा सच बा।

दावा

फेसबुक पर डालल गइल पोस्ट में लिखल रहे: सूरज के निचे रहा, काहे की सूरज से यूवी किरण निकली जो कोरोना वायरस के मारदेवेला। सभनि लोग अपन ध्यान रखी। हमरा पुरा यकीं बा की हमनी के जल्दी ठीक होजाम। सभनि लोगन दुआ करि / बढ़िया से खाई, सूती और घरे में रही।
पोस्ट के संग्रहीत संस्करण के यह देखल जा सकेला और ओकरे के एक स्नैपशॉट नीचे देवल गइल बा:

साँच के पड़ताल

का युवी किरण कोरोना के वायरस मार सकेला?

शायद। नेशनल अकादमी ऑफ़ साइंसेज के हिसाब से, ‘ई होसकेला की युवी किरण अन्य प्रकार के कोरोना वायरस के मार सकेला। एहीसे शायद ई नावेल कोरोना वायरस में कम करसकेला।’ (श्रोत)। UV-C वायरस या बैक्टीरिया के अनुवांशिक (श्रोत) के ख़त्म करेला एहिला एकरा के सार्वजनिक जगहवा पे कीटाणु मारेला उपयोग करल जायेला। बहुत्ते देश में एकहि तरीका से सभनि लोग कोरोना वायरस पे प्रयोग करतां।

ई साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एगो रिपोर्ट बा जेमे दिखाल गइल बा कि कइसे शंघाई में अधिकारी लोगन सार्वजनिक बसवा के कीटाणुरहित करेला UV किरण के उपयोग करतां।

सूरज के किरण में UV किरण होएला, त का एकर रौशनी कोरोना के वायरस मारसकेला?

अब तक हमनी के जो सचाई के जानतानी, ओकरा आधार पे सूरज के किरण कोरोना वायरस के ना मारसकेला। हमनी के पाहिले भी विस्तार से जांच करले बानी। इंहा पढ़ सकेनी।

अगर युवी किरण कोरोना के मारसकत रहे त सूरज से निकलता युवी किरण ओकरा के कहे नाही मार सकत?

कोविद -19 महामारी के शुरुए से और ओकरा बाद से, सूरज के रौशनी से वायरस के मारे वाले बहुत दावा करल। हमनी के एकरा पे जाँच पड़ताल पहिले ही करले बानी, इंहा देखि

सूरज के किरण से जो UV किरण आयेला ऊ तीन प्रकार के होएला – प्रकार ए ( जानल जायेला UV-A), प्रकार बी ( जानल जायेला UV-B) और प्रकार सी ( जानल जायेला UV-C)। ई सब में से UV-C बहुते ज्यादा ताकतवर विहीकरण बा जो सबो तरह के वायरस और बैक्टीरिया के आरएनए और डीएनए को बदलकर मारसकेला। मगर खाली UV-A और UV-B धरती तक पहुंचेला बाकी UV-C धरती के सतह तक पहुँच ना पावेला। UV-C धरती के ओजोन परत में फसंल रह जाला। (जोकि ठीक बा कहे की UV-C अगर धरती पे पहुंची त हमनी के श्राइस के चमड़ा जल सकता या त्वचा कर्क रोग होसकेला। इंहा तक की UV-A और UV-B जो धरती पे पहुंचेला, ऊ समय से पाहिले बूढ़ा कर देवेला , बहुते देर संपर्क से आवे में के चमड़ा जल सकेला या त्वचा कर्क रोग होसकेला)

तो का UV-A और UV-B रोगजनकों के ना मार सकेला? UV-A अउर UV-B बैक्टीरिया अउर रोगजनकों (स्रोत) को मारेला जानल जायेला। UV-A अउर UV-B भी कई वायरस बनावेला हैं जइसन की कि इन्फ्लुएंजा वायरस जेकर कम असर बा (स्त्रोत)। मगर एक्के समय में, सूरज के किरण (UV-A अउर UV-B) SARS वायरस (जो एगो प्रकार के कोरोना वायरस बा) के 15 मिनट के संपर्क में आवे के बाद ही कुछ वायरस अप्रभावी हो जायेला।(स्त्रोत)

हमनी के जो UV लैंप जो काम में लावेनि ऊ सतहों अउर सार्वजनिक सुविधाओं जगह पे कीटाणुनाशक के रूप में उपयोग कराल जायेला, मानव से बनल जो UV किरण बाटे ओकरो UV-C वाला फ्रीक्वेंसी बा। जबकि ई एगो बढियाँ कीटाणुनाशक होसकेला, लेकिन ई मानव जाती ला खतरा बन सकेला। वैज्ञानिक के मानल जाए तो मानव जाती से बनल UV-C किरण से नावेल कोरोना वायरस मारसकेला काहेकि उनकरा लागेला के भूतकाल ऐसेही वायरस के खिलाफ कम कराल गइल होई।

ध्यान दे: वायरस पर प्रभाव डालेवला (या अप्रभाव ड़ालेवाला) UV किरणों के बारे में उपरोक्त सबो तथ्य तभी बा जबले वायरस शरीर के बाहर बा अउर सूरज के प्रकाश के संपर्क में होवेके चाही। एक बार जब वायरस देह के भीतर घुस जाइ तोह कउनो मात्रा में सूरज या UV किरण ओकरा के ना मार सकेला।

का हमनी हाथ साफ करेला के लिए UV लैंप या UV लाइट का इस्तेमाल करेके चाही?

WHO हाथ के साफ करेला UV लैंप के उपयोग करे के खिलाफ सख्त दिशा-निर्देश देल गइल बाटे। UV लैंप मानव कोशिका पे प्रमुख नकारात्मक प्रभाव डाल सकेला अउर अच्छे से अधिक हर्जा के कारण बन सकेला । WHO वेबसाइट कहेला की, “अल्ट्रा-वायलेट (UV) लैंप के उपयोग हाथ या आपन त्वचा के कउनो क्षेत्रों के कीटाणुरहित करेला ना करे की चाही । UV विकिरण त्वचा के जलन अउर आँख में नुकसान पहुंचा सकेला।”

का सूरज के रोशनी रउवा विटामिन डी लेवे में मदद कर सकेला अउर अइसने अउर तरह के बीमारी के रोक सकेला?

सूरज के रोशनी विटामिन डी के एगो बड़ा स्रोत हो सकेला, बशर्ते रउवा सीमित समय ला हर रोज सूरज के किरण से त्वचा का एगो बड़का हिस्सा उघार के रखी। हमनी के ई बारे में वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल से बात करनी। नीचे देवल गइल वीडियो देखि:

Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

Disclaimer
Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can further read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

150,492FansLike
1,128FollowersFollow
250SubscribersSubscribe

READ MORE

Subscribe to our newsletter

Stay updated about fake news trending on social media, health tips, diet tips, Q&A and videos - all about health